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निवेश भत्ता स्कीम फिलहाल खटाई में

नई दिल्ली। आगामी आम बजट को लेकर पूरा कॉरपोरेट जगत भले ही निवेश भत्ता संबंधी योजना को फिर से शुरु करने के लिए जबरदस्त हल्ला मचा रहा हो लेकिन राजस्व विभाग ने इसे फिलहाल खारिज कर दिया है। अब अगर कॉरपोरट जगत इसके लिए कोई राजनीतिक दबाव नहीं बना पाया तो आगामी बजट में इसका दिख पाना असंभव है।

निवेश भत्ते यानी इनवेस्टमेंट एलाउंस का मतलब ऐसी टैक्स रियायत से है जो कंपनियों को नया निवेश करने पर मिलती है, चाहे वह ग्रीन फील्ड प्रोजेक्ट को या ब्राउन फील्ड। ग्रीन फील्ड का मतलब नई परियोजना से है जबकि ब्राउन फील्ड का मतलब मौजूदा परियोजना का ही विस्तार।

हाल ही में सरकार के साथ हुई कई बैठकों में कॉरपोरेट जगत ने निवेश भत्ता योजना फिर से शुरु करने के लिए खासा हल्ला मचाया है। कॉरपोरेट जगत के तर्क के मुताबिक पहले यह योजना जारी रह चुकी है। साथ ही इस समय निवेश बढ़ाने की जरुरत है। लिहाजा, रोजगार बढ़ाने को इस भत्ते के तौर पर कंपनियों को टैक्स प्रोतसाहन देना जरुरी है। घरेलू मांग में कमी के चलते कंपनियां पहले ही स्थापित उत्पादन क्षमता उपयोग सुनिश्चित होना जरुरी है। नये निवेश की जरुरत  तब आएगी जब कंपनियां मौजूदा उत्पादन क्षमता का 100 फीसदी उपयोग करना शुरु करें।

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