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भाजपा में आदिवासी चेहरे की तलाश शुरू

प्रदेश भाजपा में एक अदद आदिवासी चेहरे की तलाश शुरू हो गयी है। जिसे संगठन का महत्वपूर्ण पद देकर भाजपा विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुटे। प्रतिपक्ष के नेता पद से पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा के इस्तीफे और इस पद की जिम्मेदारी सदन के उप नेता डॉ दिनेश षाडांगी और अशोक कुमार को दिये जने के बाद झरखंड भाजपा में आदिवासी नेता के महत्व का विषय और उभरा है।

आदिवासी बहुल राज्य में भाजपा हमेशा एक आदिवासी नेता को सामने रखने का काम भी करती रही है। कभी ललित उरांव को आगे रखा गया तो बाद में उनका स्थान कड़िया मुंडा और फिर बाबूलाल मरांडी ने लिया। उसके बाद फिर अर्जुन मुंडा को आगे किया गया। मुख्यमंत्री बनाया गया, वहां से हटने के बाद प्रतिपक्ष का नेता पद दिया गया। अब झरखंड में न तो अर्जुन मुंडा हैं और न कड़िया मुंडा। दूसरे आदिवासी नेता सुदर्शन भगत भी संगठन से दूर लोकसभा में पहुंच गये हैं। प्रदेश अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, महामंत्री, जैसे सभी महत्वपूर्ण पदों पर गैर आदिवासी विराजमान हैं।

सूत्रों के अनुसार प्रदेश भाजपा के शीर्ष स्तर पर इन विषयों पर चर्चा के बाद कुछ लोग प्रदेश अध्यक्ष रघुवर दास को प्रतिपक्ष के नेता पद की जिम्मेदारी दिये जने की वकालत करने लगे हैं। आलाकमान तक इस तर्क को पहुंचाया जा रहा है कि रघुवर दास को विधानसभा  का चुनाव लड़ना है, इसलिए उनके लिए प्रतिपक्ष के नेता का पद सबसे उपयुक्त है। अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी ऐसे किसी तेज तर्रार आदिवासी नेता को दिया जाये जो विधानसभा चुनाव में दूसरे क्षेत्रों में भी पूरा समय दे सके। प्रभाव डाल सके।

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  • Web Title:भाजपा को चाहिए एक अदद आदिवासी चेहरा