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तेजी से पांव पसार रहा बेतरतीबी का घना जंगल

विश्व की सांस्कृतिक राजधानी में एक तरफ पर्यटन को बढ़ावा देने के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं। कभी मेट्रो तो कभी हैंगिंग ट्रेन दौड़ाने की बात। किंतु विकास के नाम पर इन सब छलावें से इतर शहर में सुनियोजित विकास के नाम पर कुछ भी नहीं। अनियोजन की पराकाष्ठा है। प्राधिकरण के पास कोई प्लान नहीं, न ही निगरानी के लिए सशक्त मशीनरी। जो है नतीजा, अच्छा भला शहर कबाड़ होता जा रहा है।

बेतरतीबी का एक ऐसा घना जंगल पसरता जा रहा जिसमें आने वाले दिनों में लोग मुट्ठी भर ताजी हवा को तरस कर रह जाएंगे। पिछले तीन वर्षो में यहां 52 हजार 372 आवासों की नींव पड़ी है। आंकड़े बोलते ह कि इसमें 99 फीसदी तो बिना प्लान के हैं। इन नए आवासीय इलाकों में कहीं चार फीट का रास्ता, कहीं आठ तो कहीं दस फीट का, कुछ में वह भी नहीं। लोग आशियाना तो बना लिए हैं पर रास्ता मिलने के इंतजार में हैं। न सीवर न ही पेयजल की सुविधा। न बिजली के पोल। आखिर यह सब क्या है? अफसरों के पास कोई जवाब नहीं।

सूबे की सरकार का भी इस ओर ध्यान नहीं। पर्यटन नगरी की भले ही ऐसी की तैसी हो, जमीन-जायदाद की खरीद फरोख्त से उसके खजाने में प्रतिवर्ष राजस्व के रूप में करोड़ों रुपये आ रहे हैं। वित्तीय वर्ष 2008 में 4999.54 लाख रुपये सिर्फ आवासों के बैनामे से प्र्राप्त हुए हैं।

आवासीय जमीनों के क्रय विक्रय की पिछले तीन वर्षो की स्थिति यह रही कि उप निबंधन द्वितीय के क्षेत्र यानी संत रविदास की कर्मभूमि सीरगोवर्धन, लहरतारा, छितौनी,टिकरी, नगवां, लंका, सुंदरपुर आदि क्षेत्र में सर्वाधिक 14044 आवासीय बैनामे हुए। इस वित्तीय वर्ष में आशियाने के वास्ते कुल 4951 रजिस्ट्री विभाग में अभिलेख प्रस्तुत किए गए।

उप निबंधक चतुर्थ। यानी मुंशी प्रेमचंद्र की कर्मभूमि लमही, तरना, लेढूपुर, आशापुर का कुछ क्षेत्र, ऐढ़े, तिलमापुर, हीरामनपुर आदि क्षेत्र पब्लिक की दूसरी चाहत रही। यहां कुल दस हजार 327 आवासीय बैनामे हुए। पिछले वर्ष की तुलना में यहां 463 रजिस्ट्री ज्यादा हुई।

उप निबंधक प्रथम का क्षेत्र या यूं कहे कि पब्लिक की तीसरी पसंद महात्मा बुद्ध की कर्मभूमि क्षेत्र सारनाथ, अकथा, आशापुर, पांडेयपुर, पहड़िया, बेनीपुर, आदमपुर और जैतपुरा आदि रहा। 8111 आवासीय बैनामे यहां हुए।

उप निबंधक तृतीय का क्षेत्र यानी चेतगंज, दशाश्वमेध, भोजूबीर आदि शहरी होने के कारण यहां आवास के बाबत महज 2253 रजिस्ट्री हुई। हालांकि पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष 25 अधिक रहा।

पिछले तीन वर्ष में पिंडरा क्षेत्र में कुल 2018, रामनगर क्षेत्र में 2958 व गंगापुर में कुल 2661 आवासीय बैनामे हुए। इस प्रकार कोई ऐसा क्षेत्र नहीं रहा जहां आवास निर्माण के लिए रजिस्ट्री कम हुई। गांव व अन्य जिलों से पलायन कर पब्लिक जिस तेजी के साथ नई उम्मीदों के संग काशी में बस रही है। उसका भविष्य बहुत उज्ज्वल नहीं दिखता। अतिशीघ्र यहां कोई प्लानिंग मूर्तरूप नहीं ली तो पब्लिक बदतर जिंदगी जीने के लिए विवश होगा।

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