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सरकारी प्रावधान से टूटे दो हजार कर्मियों के सपने

घर के रहे, न घाट के। नोएडा अथॉरिटी के कर्मचारियों पर यह कहावत सटीक बैठ रही है। विशेषाधिकार होने के बावजूद कर्मचारी अपने लिए छत नहीं बना पा रहे हैं। इसकी वजह है सेक्टरों का भारी-भरकम रेट और सरकारी प्रावधान। इसके कारण नोएडा में प्लॉट खरीदना कर्मचारियों के बूते से बाहर है, और मिले प्लॉट को बेचकर किसी गांव में अपना घर बनाने की छूट उन्हें है नहीं।


नोएडा अथॉरिटी में करीब दो हजार कर्मचारी कार्यरत हैं। अथॉरिटी के कानून के मुताबिक आवासीय स्कीम में कर्मचारियों को प्लॉट पाने का विशेषाधिकार है। इससे कर्मचारी आसानी से नोएडा में प्लॉट पा सकते हैं। अब तक करीब 50 लोग इसका फायदा उठा चुके हैं। दस साल पहले तक कर्मचारियों को यह भी छूट थी, कि अगर वे चाहें तो प्लॉट को बेच सकते हैं। इसके बाद अथॉरिटी ने कर्मचारियों के प्लॉट निकलने पर उसे बेचने के अधिकार पर रोक लगा दिया। अब सभी सेक्टरों का रेट इतना बढ़ गया है कि कर्मचारी उसे खरीदने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे।
कर्मचारियों का कहना है कि प्लॉट निकलने पर उसे बेचकर कहीं छोटा-मोटा घर बनाया जा सकता था। यहां तक कि किसी महंगे सेक्टर में प्लॉट निकलने पर उसे किसी सस्ते सेक्टर में कनवर्ट करने का भी अधिकार नहीं है। अथॉरिटी ने ऐसे कानून बनाकर कर्मचारियों के छत का सपना तोड़ दिया है। इस बारे में नोएडा एम्पलाइज एसोसिएशन के अध्यक्ष चौ. कुशलपाल व पूर्व अध्यक्ष राजकुमार चौधरी भी एक सुर में कहते हैं कि अथॉरिटी का यह फैसला कर्मचारियों के हित में नहीं है। इससे कर्मचारी अपने लिए छत नहीं बना पा रहे। चौ. कुशलपाल ने बताया कि इस रोक को हटाने के लिए मुख्यमंत्री को पत्र भेज गया है, जल्द ही कोई निर्णय आने की उम्मीद जताई।

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