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स्कूलों का सर्वे महज खानापूर्ति

स्कूलों के सर्वे में महज खानापूर्ति बरती जा रही है। सर्वे में शामिल टीमों को न तो स्कूलों का नक्शा दिया गया है,  न ही कंपलीशन फाइल। बिना इनके टीम स्कूलों की असलियत का कैसे खुलासा कर पाएगी? यह सर्वे रिपोर्ट ही बता पाएगी।

दूसरी ओर हुडा कार्यालय में कनिष्ठ अभियंताओं के प्रशासनिक स्तर पर फेरबदल किए जाने की चर्चा के चलते सर्वे का काम प्रभावित रहा। ट्रांसफर होने से घबराए टीम के एक जेई ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि ट्रांसफर लिस्ट आउट होने के बाद ही उनका मन काम में लगेगा।


विदित हो कि हुडा के संपदा अधिकारी कैप्टन मनोज कुमार ने सर्वे विभाग को स्कूलों द्वारा भेजे गए नोटिस के जबाव में दी गई जानकारियों की असलियत का पता लगाने के निर्देश दिए थे। टीम स्कूल में जकर यह देखना है कि कहीं स्कूलों द्वारा दिया गया जबाव गलत तो नहीं? कहीं उनके यहां व्यवसायिक गतिविधियां तो नहीं चलाई जा रही हैं? नक्शा के अनुरूप बिल्डिंग प्लॉन है या नहीं। इसी तरह स्कूलों द्वारा दी गई अन्य जनकारियों के बारे में टीम को सव्रे के दौरान पता लगाना था। सव्रे की यह रिपोर्ट सोमवार तक तैयार कर ली जानी है। शुक्रवार से यह सर्वे शुरू हुआ। शनिवार को टीम में शामिल एक जेई से जब स्कूलों में अब तक किए गए सर्वे के बारे पूछा तो उनका कहना था कि वे इसके लिए टाइम लेंगे।

अभी तक न तो उन्हें स्कूलों का नक्शा मिला है और न ही कंपलीशन फाइल। इस बारे में एक जेई का तो यहां तक कहना था कि उनके कार्यालय में ट्रांसफर की सूची तैयार है। जिसके जल्द आउट होने की उम्मीद है। इसके बाद ही उनका मन काम में लगेगा। उधर, हुडा के एसडीओ रतन सिंह सिवाच का कहना है कि सर्वे टीम को पहले ही कह दिया गया है कि वह स्कूलों में जाकर व्यवसायिक गतिविधियों के बारे में पता लगाएं। जिन स्कूलों में नक्शे के मुताबिक बिल्डिंग प्लॉन नहीं है। उनमें सरसरी तौर पर नजर मारने के बाद यह आसानी से पता लग सकता है। उन्हें नक्शा व किसी कंपलीशन फाइल की जरूरत ही नहीं है

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