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मेरे आगामी पाच वर्ष न्यायिक सुधार के होंगे

कर्नाटक के मुख्यमंत्री रह चुके वीरप्पा मोइली कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हैं। प्रशासनिक सुधार आयोग के चेयरमैन रहते हुए उन्होंने अनेक सुधारों की सिफारिशें की हैं। न्यायपालिका से जुड़ी समस्याओं को भी वह गवर्नेस की खामी से जोड़कर देखते हैं। उनका मानना है कि न्यायिक सुधार भी प्रशासनिक समस्या है, जिसका हल बहुत आसान है। मोइली का कहना है कि यदि देश के हर पुलिस थाने में फोरेंसिक जंच की मोबाइल वन मुहैया करवा दी जाए तो जंच जल्दी होगी, मुकदमे तेजी से निपटेंगे और आम आदमी को न्याय भी शीघ्र मिलेगा। वह पूछते हैं कि क्या इसके लिए संविधान में संशोधन करने की जरूरत है? इसी तरह की समस्याओं से न्यायपालिका जूझ रही है। विधिमंत्री का कार्यभार ग्रहण करने के दौरान वह विशेष संवाददाता श्याम सुमन से रु-ब-रू हुए।

विधि मंत्री का कार्यभार ग्रहण करने पर आपकी प्राथमिकताएं क्या होंगी?
प्राथमिकताएं तय करना अभी जल्दीबाजी होगी। लेकिन आप देखेंगे कि मेरे कार्यकाल के आने वाले पांच वर्ष न्यायिक सुधार के होंगे। न्याय मंत्रालय में असल समस्या प्रशासन की है और कुछ प्रणालीगत खामियां हैं। इन्हें दूर करने का प्रयास किया जएगा।  

देश की न्याय व्यवस्था में लंबे समय से न्यायिक सुधार की आवश्यकता है, इस पर आप क्या प्रयास करेंगे?
देखिए न्यायिक सुधार एक ऐसी चीज है, जिसे आप टुकड़ों में नहीं कर सकते। इसके लिए संपूर्णता में प्रयास करना होगा। गवनेर्ंस सही रही तो न्यायिक सुधार अपने आप हो जएगा।

अदालतों में बैक लॉग को कम करवाने का प्रयास कैसे करेंगे?
अदालतों में सबसे ज्यादा मुकदमे सरकार के होते हैं, कोशिश की जएगी कि सरकार के मुकदमे कम किए जएं। सरकार के मुकदमे प्रशासनिक खामियों की वजह से हैं। इसलिए इसेमुकदमे से संबंधित समस्या के रूप में नहीं देखना चाहिए। प्रशासनिक खामियों के चलते अधिकारी कोर्ट से व्यवस्था लेना ज्यादा पसंद करते हैं और नतीजतन मुकदमे बढ़ते रहते हैं।

उच्च न्यायपालिका के जजों की संपत्ति की घोषणा न करने के बारे में आप क्या कहेंगे?
वसे तो इस बारे में जजों की इनहाउस प्रणाली है और वे देश के मुख्य न्यायाधीश को नियमित रूप से अपनी आय की घोषणा करते हैं। मै कहना चाहूंगा कि हमारे जज बहुत ही काबिल और मेहनती हैं।

लेकिन यह प्रणाली ठीक काम नहीं कर रही है और आय घोषणा करना भी स्वच्छिक है? मुख्य न्यायाधीश स्वयं कह चुके हैं कि कानून के अभाव में जज अपनी संपत्ति की घोषणा के लिए बाध्य नहीं हैं?
इस बारे में उच्च न्यायपालिका से बात की जएगी और उन्हें विश्वास में लिया जएगा। फिर भी यदि जरूरत पड़ी तो इसके लिए कानून बनाने पर विचार किया ज सकता है। 

उच्च न्यायपालिका में नियुक्ितयों को लेकर पारदर्शिता नहीं है, इस पर आपकी क्या योजना है? विधि आयोग भी कह चुका है कि जजों की नियुक्ित से संबंधित फैसले की समीक्षा होनी चाहिए या नया कानून बनना चाहिए?
यह बहुत महत्वपूर्ण प्रश्न है, न्यायिक नियुक्ितयों में पारदर्शिता की बहुत आवश्यकता है। मंत्रालय इसे देखेगा और पारदर्शिता लाने के लिए भरपूर कोशिश करेगा।

न्यायपालिका को पूर्ण आर्थिक स्वायत्तता प्राप्त नहीं है। इस बारे में क्या करेंगे?
देखिए न्यायपालिका के लिए बजट के आवंटन समस्या नहीं है, यह प्रणालीगत खामी है, जिस कारण न्यायपालिका को धन के लिए सरकार की ओर देखना पड़ता है, वह इसे दूर करने का प्रयास करेंगे।

भ्रष्टाचार के आरोप में कोलकाता हाईकोर्ट के एक जज जस्टिस सौमित्र सेन पर चलाए ज रहे महाभियोग पर आपका क्या कहना है ?
भ्रष्टों को संरक्षण देने में सरकार का कोई निहित स्वार्थ नहीं है। सेन के खिलाफ महाभियोग की कार्यवाही राज्यसभा में लंबित है, इसलिए उस पर मैं कुछ नहीं कहूंगा। यह कार्यवाही निश्चित रूप से अपने मुकाम तक पहुंचेगी।

बोफोर्स तोप सौदे में दलाली लेने के आरोपी इतालवी व्यावसायी ओटावियो क्वात्रोकी को क्लीन चिट देने पर आपका क्या कहना है?
क्लीन चिट देने का सीबीआई का यह सही फैसला था। इस संबंध में पूर्व मंत्री एचआर भारद्वाज ने जो कुछ भी (सीबीआई को कानूनी सलाह) किया है उसे वह आगे बढ़ाएंगे। कहना चाहूंगा कि भारद्वाज ने अपने कार्यकाल में विधि मंत्रालय की महति सेवा की है, वह कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हैं, मैं उनका बहुत सम्मान करता हूं।

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