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31 मई को वल्र्ड नो टोबैको डे

धूम्रपान और तंबाकू सेवन के  बढ़ते मामलों से चिंतित विशेषज्ञों का कहना है कि अगर तंबाकू उत्पादों के  पैकेटों पर इसके  सेवन से होने वाले दुष्प्रभावों के  बारे में सचित्र चेतावनी दी जाए तो इस बुरी लत को दूर करने में काफी सहायता मिल सकती है।

अर्तेमिस हेल्थ इंस्टीटयूट के  सीईओ डा. कुशाग्र कटारिया ने बताया कि दुनिया भर में ओरल कैंसर के  सर्वाधिक मामले वाले देशों में भारत भी एक है। हमारे देश में यह दर प्रति एक लाख की आबादी में 12.6 है। मुख कैंसर का मुख्य कारण तंबाकू  है लेकिन फिर भी इसके  सेवन से लोग बाज नहीं आते। इसके  बारे में गंभीर चेतावनी दी जानी चाहिए।


गौरतलब है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने वर्ल्ड नो टोबैको डे (31 मई) पर सदस्य देशों से टोबैको हेल्थ वार्निंग पर ध्यान देने के  लिए कहा है। डब्ल्यूएचओ की दक्षिण पूर्व एशिया के  लिए क्षेत्रीय निदेशक डा. सामली प्लि अनबैंगचांग ने तंबाकू उत्पादों के  पैकेटों पर स्वास्थ्य संबंधी चेतावनी अंकित किए जने को धूम्रपान नियंत्रण की कारगर रणनीति के  लिए महत्वपूर्ण बताया है। उन्होंने कहा कि यह स्वास्थ्य को होने वाले गंभीर खतरे के  बारे में जगरूकता फैलाने के  लिए अत्यंत उपयोगी तरीका है। डा. सामली के अनुसार, इस चेतावनी में तंबाकू के  दुष्परिणामों के  बारे में विस्तृत जानकारी और चित्र होने चाहिए। इसकी त्वरित प्रतिक्रिया मिलती है।

उन्होंने कहा कि तंबाकू कानूनी तौर पर उपलब्ध एकमात्र ऐसा उत्पाद है जो कई लोगों की मौत का कारण होता है। उन्होंने बताया कि दक्षिण पूर्व एशिया में हर साल करीब 10.2 लाख लोग तंबाकू उत्पादों के  कारण मौत के  शिकार होते हैं। इसकी रोकथाम के  लिए केवल कार्यक्रम की नहीं बल्कि एक कारगर तंबाकू नियंत्रण रणनीति की जरूरत है।
डा कटारिया ने बताया कि धूम्रपान न करने वालों की तुलना में धूम्रपान करने वालों को ओरल कैंसर होने की आशंका नौ गुना अधिक होती है। तंबाकू का सेवन न करने वालों की तुलना में तंबाकू का सेवन करने वालों को ओरल कैंसर की आशंका 50 गुना अधिक होती है।


उन्होंने यह भी बताया कि औसतन हर दिन करीब 50 हजर से अधिक युवा धूम्रपान या तंबाकू का सेवन शुरू करते हैं, जबकि यह ऊज्रवान शक्ति  देश के विकास के  लिए बहुत उपयोगी है। फोर्टिस अस्पताल में पल्मोनोलाजी एंड क्रि टिकल केयर के  वरिष्ठ कन्सल्टेंट डा. मृणाल सरकार ने बताया कि सरकार और गैर सरकारी संगठनों द्वारा तंबाकू के  बारे में वधानिक चेतावनी दिए जने और धूम्रपान विरोधी जगरूकता अभियान चलाए जने के  बावजूद भारत में धूम्रपान करने वालों की संख्या 9.4 करोड़ है।

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