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जिले में संचार व्यवस्था से लैस स्थायी कंट्रोल रूम बनाने का निर्देश

बीते साल कोसी की बाढ़ को देखते हुए राज्य सरकार ने इस बार पहले से ही एहतियाती कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। अगर बाढ़ आयी तो पीड़ितों को कैसे निकाला जाएगा, कहां ठहराया जाएगा, क्या खिलाया जाएगा और पूरा तंत्र कैसे काम करेगा इसके लिए रणनीति तैयार की जा रही है। आपदा प्रबंधन विभाग के प्रधान सचिव आर.के.सिंह ने सभी प्रमंडलीय आयुक्तों और जिला अधिकारियों को बाढ़ पूर्व की तैयारियों के मद्देनजर निर्देश जारी किया है।

जिला स्तर पर संचार माध्यमों से युक्त कंट्रोल रूम की स्थापना होगी साथ ही राहत कार्य में पारदर्शिता के लिए पंचायत, प्रखण्ड और जिला स्तर पर नोडल पदाधिकारियों का मनोनयन किया जाएगा। अधिकारियों को निर्देश किया गया है कि उन इलाकों की सूची तैयार कर लें जहां बाढ़ आने की संभावना बनी रहती है। इसमें बाढ़ के पूर्व के इतिहास, भौतिक संरचना, बाढ़ से हुई क्षति के आंकड़े और प्रभावित गांवों का जिक्र होगा।

जिला स्तर पर इन सूचनाओं को संग्रहित कर विभाग को भेजने का निर्देश दिया गया है। राज्य सरकार इन सूचनाओं को केन्द्र सरकार को उपलब्ध कराएगी। सरकारी नावों को भी ठीक-ठाक करा लेने को कहा गया है। खास बात यह है कि बाढ़ के समय बिजली, टेलीफोन, सड़क और पुलों की सुरक्षा के लिए भी रणनीति बनायी जा रही है। तटबंधों की सुरक्षा के लिए चिह्न्ति स्थानों पर खाली बोरे, लोहे के जाल तथा बालू की पर्याप्त व्यवस्था करने का निर्देश दिया गया है। शरण स्थलों को चिह्न्ति करने को कहा गया है जहां पीएचईडी द्वारा जन सुविधाओं की व्यवस्था की जाएगी।

इसके अलावा बाढ़ की तैयारियों की बाबत स्वयंसेवकों, क्षेत्रीय कर्मचारियों और गैर सरकारी संगठनों के साथ नियमित अंतराल पर मॉक ड्रील आयोजित करने को कहा गया है। आपदा जोखिम प्रबंधन के तहत राज्य के 14 जिलों में केन्द्र सरकार एवं यूएनडीपी द्वारा संचालित आयोजनों में जिला स्तर पर विभिन्न समितियां गठित की जा रही हैं। 30 जून तक इनका गठन, इनके सदस्यों की ट्रेनिंग, योजना निर्माण और ग्रामीणों का मॉक ड्रील पूरा किया जाना है। 

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  • Web Title:बाढ़ पूर्व की तैयारियों पर सरकार का जोर