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हाई कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने जुटाए थे आंकड़े

बिहार के लगभग तीन सौ बच्चे अभी भी पुलिस के रिकार्ड में लापता हैं। इसका पता तब लगा था जब उच्च न्यायालय ने पुलिस मुख्यालय से लापता बच्चों की जानकारी मांगी थी। इसी दौरान यह भी पता चला था कि वर्ष 2001 से लेकर 2007 के बीच अपहरण के बाद 75 बच्चों की हत्या कर दी गई। चर्चित गोलू अपहरण कांड के बाद दायर एक याचिका की सुनवाई के क्रम में उच्च न्यायालय ने पुलिस मुख्यालय को लापता बच्चों का पता लगाने का निर्देश दिया था।

इस मामले की देख-रेख की जिम्मेवारी तत्कालीन एडीजी (कमजोर वर्ग) ए.के. गुप्ता को सौंपी गई थी। तब लापता बच्चों को लेकर खूब काम हुआ था लेकिन पिछले वर्ष उच्च न्यायालय ने इस मामले की सुनवाई बंद कर दी और इसके बाद तफ्तीश का दौर भी खत्म हो गया। उच्च न्यायालय में जब इस मामले की सुनवाई खत्म हुई तब भी 275 लापता बच्चों का पता लगाना बाकी था। लेकिन पुलिस अधिकारियों का कहना था कि इनमें से अधिकतर मामले प्रेम विवाह के हैं।

जब बच्चे किसी कारण से घर से भागते हैं तो परिजन उनके लापता होने के मामले थाने में दर्ज करा देते हैं लेकिन जब वे खुद लौट आते हैं तो इसकी जानकारी पुलिस को नहीं दी जती है। पुलिस मुख्यालय सूत्रों के अनुसार वर्ष 2007 के जून माह में पुलिस अफसरों की एक बैठक में पता चला कि राज्य के 307 बच्चे लापता हैं और इनमें 60 फीसदी ऐसी लड़कियां हैं जिनकी उम्र 18 वर्ष से कम है।

आशंका थी कि लड़कियों का अपहरण अनैतिक व्यापार के लिए किया गया है। बच्चों के गायब होने के कारण भी अलग-अलग थे। कुछ मामलों में तो अस्पताल में जन्म के साथ ही बच्चे को गायब कर दिया गया था। पुलिस मुख्यालय के आला अधिकारियों का दावा था कि अपहरण अथवा लापता के 60 से 70 प्रतिशत मामले प्रेम विवाह के हैं। 18 वर्ष तक के कई किशोर व किशोरियां प्रेम विवाह के लिए घर से भागे थे और उनके अभिभावकों ने अपहरण का मामला दर्ज करा दिया। ऐसे कई बच्चों की शादी के प्रमाणपत्र भी न्यायालय में प्रस्तुत किए गए थे।

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  • Web Title:पुलिस रिकार्ड में लापता हैं तीन सौ बच्चे