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बंद होंगी अपनी मंडियां

प्रशासन की जमीन पर लगने वाली अपनी मंडियों को बंद करने का फैसला किया गया है। ये मंडियां अलग-अलग सेक्टरों में हर हफ्ते लगाई जाती हैं और बड़ी संख्या में लोग इनमें सब्जियां खरीदते हैं। लोगों की सुविधा के लिए कई सालों से मंडियों को लगाया जा रहा है, लेकिन हाल ही में प्रशासन के लैंड एक्वजिशन अधिकारी की तरफ से जारी आदेश में कहा गया है कि अब प्रशासन की जमीन पर मंडियों को लगाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। प्रशासन ने निगम को अपने फैसले के बारे में सूचित कर दिया है। 


33, 43, 49 व 40 में प्रशासन की जमीन पर मंडियों को लगाया जा रहा है। हालांकि जमीन प्रशासन की है लेकिन इन्हें लगाने की अनुमति नगर निगम दे रहा है। मंडियों को पंजाब मंडी बोर्ड की तरफ से लगाया जाता है और निगम इनसे हर हफ्ते शुल्क भी वसूल करता है लेकिन प्रशासन के फैसले से इन मंडियों में बैठने वाले सैकड़ों किसानों में हड़कंप मच गया है।


लैंड एक्वजिशन अफसर ने निगम के एडीशनल कमिश्नर को लिखी चिट्ठी में कहा है कि निगम अपनी मंडी और डे मार्केट प्रशासन की जमीन पर लगाने की अनुमति दे रहा है। इससे समस्या पैदा हो रही है क्योंकि प्रशासन की जमीन की बुकिंग एस्टेट आफिस से होती है। इससे भ्रम पैदा हो जाता है।


सेक्टर 43 का उदाहरण देते हुए कहा गया है कि  जिन जगहों पर अपनी मंडियों को लगाया जा रहा है, उनमें आने वाले लोग सड़क के किनारे ही वाहनों को खड़ा करके सब्जियां खरीदते हैं, जिससे हादसे का खतरा बना रहता है, इसलिए यहां पर मंडियों को बंद किया जता है। इसी तरह से अन्य सेक्टरों में भी मंडियों को बंद किया जाता है। एलएओ ने अपनी चिट्ठी में पुलिस की आपत्तियों को भी आधार बनाया है, जिसमें कहा गया है कि अपनी मंडी से बहुत समस्या हो रही है। कई किसान शुक्रवार को निगम के अफसरों से मिले, लेकिन वहां से उन्हें कोई राहत नहीं मिल सकी है।


केंद्रीय मंत्री एमएस गिल को लिखी चिट्ठी
अपनी मंडी एसोसिएशन ने प्रशासन के फैसले की शिकायत केंद्रीय मंत्री एमएस गिल से की है। अपनी मंडी एसोसिएशन के अध्यक्ष राजिंदर सिंह मनाना की तरफ से लिखी चिट्टी में उनसे मामले में दखल देकर किसानों को बचाने की गुहार की गई है। किसानों के प्रतिनिधियों का कहना है गिल जब चंडीगढ़ के चीफ कमिश्नर थे तब ही किसानों की सुविधा के लिए उन्होंने इस तरह की मंडिया लगाने की अनुमति दी थी। मनाना ने अपनी चिट्ठी में कहा है कि किसान बगैर किसी कमीशन के सीधे उत्पाद बेचते थे और चंडीगढ़ के लोगों को भी इससे फायदा होता है। उन्होंने कहा है कि यदि सड़क हादसों का ही डर है तो फिर यहां पर ट्रैफिक पुलिस कर्मचारी नियुक्त किए जा सकते हैं, लेकिन किसानों की रोजी रोटी को बंद करने से कोई फायदा नहीं होने वाला है।

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  • Web Title:बंद होंगी अपनी मंडियां