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वाकई अनुपम हैं ये...

वाकई अनुपम हैं ये...

अनुपम खेर ने हिन्दी सिनेमा में अपने 25 वर्ष पूरे कर लिए हैं। उन्हें ढेरों बधाई। उन्हें पुख्ता पहचान देने वाली उनकी पहली फिल्म ‘सारांश’ में उन्होंने 26 साल की उम्र में 65 साल के एक लाचार और संघर्षशील पिता की भूमिका निभा सिनेमाप्रेमियों के  दिलों में अपने अभिनय की ऐसी छाप छोड़ी कि वह प्रयोगधर्मी कहलाने लगे। अनुपम ने अलग-अलग तरह के किरदार कर खुद को साबित किया, लेकिन पिता की भूमिकाओं को करते-करते उन्होंने इस किरदार के कई तरह के मिथक को भी तोड़ा। ‘राम लखन’, ‘डैडी’, ‘दिल है कि मानता नहीं’, ‘दिल’, ‘तेजाब’, ‘हम आपके हैं कौन’, ‘और प्यार हो गया’, ‘क्या कहना’, ‘खोसला का घोसला’ और ‘विवाह’ आदि दजर्नों फिल्मों में उनके पिता के विविधतापूर्ण रूपों को भला कौन भूल सकता है। यही तो जादू है  उनका। तभी तो उन्हें हाल में ही हॉलीवुड दिग्गज  वूडी एलन ने अपनी आगामी फिल्म में फ्रीडा पिंटो के पिता का रोल ऑफर किया। यूं तो उन्होंने 1982 में  फिल्मों में ‘आगमन’ किया, लेकिन उन्होंने ‘अपमान’  को ‘जाने भी दो यारो’ कहते हुए ‘जवानी’ भी पा ली। आखिरकार थिएटर से आए अनुपम की प्रतिभा का ‘सारांश’ दिखा 1984 में और फिर क्या था। देखते ही देखते वे व्यस्त कलाकार बन गए और सफलता के इन 25 वर्षो में 285 से भी अधिक फिल्में उन्होंने कर डालीं। सिनेमाप्रेमी उन्हें ‘तेजाब’ में बीवी-बेटी की कमाई पर ऐश करने वाले पिता श्यामलाल, ‘दिल’ में  कंजूस पिता हजरी प्रसाद, ‘क्या कहना’ में प्रिटी जिंटा के प्यारे पिता गुलशन बख्शी, ‘खोसला का घोसला’ के शरीफ पिता जसे किरदारों को याद करते हैं तो दूसरी तरफ सुभाष घई की ‘कर्मा’ में ट्रैजिडी किंग दिलीप कुमार के सामने खड़े डॉन डॉ. डैंग के चेहरे को भी नहीं भूल पाते। ‘बेटा’ में लोभी तोलाराम के रूप में अनुपम ने अपने अभिनय का अलग रूप दिखाया था। और पिछले साल आयी ‘ए वेडनेसडे’ में उन्होंने पुलिस कमिश्नर की भूमिका में प्राण डाले।

‘राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय’ से पढ़ाई के बाद  थिएटर का गहरा अनुभव प्राप्त कर अनुपम मुंबई पहुंचे। उन्होंने निर्माता-निर्देशक के रूप में भी भाग्य आजमाया, लेकिन सफलता नहीं मिली। 2002 में ‘ओम जय जगदीश’ से निर्देशन की शुरुआत की तो 2005 में एक गंभीर विषय पर ‘मैंने गांधी को नहीं मारा’ फिल्म का निर्माण कर डाला। इतना ही नहीं उन्होंने ‘वक्त हमारा है’, ‘

श्रीमान आशिक’ और ‘इज्जत की रोटी’ के लिए गाना भी गाया। उन्हें ‘खेल’ और ‘डर’ के लिए ‘बेस्ट कॉमेडियन का फिल्म फेयर अवॉर्ड’ तो ‘खोसला का घोसला’ के लिए ‘बेस्ट कॉमेडियन का जीफा अवार्ड’ मिला और ‘बेस्ट सपोर्टिग एक्टर का स्क्रीन अवाॉर्ड’ ‘ए वेडनेसडे’ के लिए प्राप्त किया। ‘राष्ट्रीय नाटच्य विद्यालय’ और ‘इंडियन सेंसर बोर्ड’ के अध्यक्ष पर अपनी सेवा दे चुके अनुपम इन दिनों ‘लम्हा’, ‘चाय गरम’, ‘अपार्टमेंट’, ‘नॉटी40’ आदि में काम कर रहे हैं।
 

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