DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

नस्लवाद की आग

आस्ट्रेलिया में भारतीय छात्रों पर नस्लवादी हमले भूमंडलीकरण की उस कमजोरी की ओर संकेत करते हैं जिसे पूंजी, व्यापार और प्रौद्योगिकी के निर्बाध आवागमन की दिशा में बढ़ने के बावजूद दूर नहीं किया जा सका है। एक हफ्ते के भीतर दो छात्रों पर हमले जिसमें एक की स्थिति गंभीर बनी हुई है, यह बताती है कि वहां के स्थानीय लोगों के भीतर कहीं कोई नफरत सुलग रही है, जिसे वहां की सरकार समझ नहीं पाई है। क्योंकि  हमलों की यह घटनाएं इसी हफ्ते शुरू हुई हों ऐसा नहीं है। वे पिछले छह सालों से होती रही हैं, जिसके शिकार 60 भारतीय छात्र हुए हैं।

इसका अर्थ यह है कि इनका अर्थव्यवस्था में आई तात्कालिक मंदी या उसके कुछ दिनों पहले आतंकी मामलों में संदिग्ध पाए गए और फिर दोषमुक्त किए गए भारतीय युवक संबंधी घटनाओं से ज्यादा लेना-देना नहीं है। इसका मतलब यही लिया ज सकता है कि अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी, रूस और दक्षिण अफ्रीका की तरह आस्ट्रेलिया में भी नस्लवाद एक समस्या के तौर पर मौजूद है और वह रह-रह कर अपना सिर उठाती रहती है।

दूसरी तरफ भारतीयों में आस्ट्रेलिया जने की ललक काफी है और यही वजह है वहां के करीब 90 हजर विदेशी छात्रों में भारतीयों की संख्या करीब 20 हजर है। वे सब वहां बिजनेस स्टडीज, इंजीनियरिंग , इनफारमेशन टेक्नोलॉजी, साइंस और हॉस्पिटलिटी के कोर्स करने जते हैं, जिनकी पढ़ाई और जिन पर आधारित रोजगार से जुड़ने के बाद वे तमाम तरह की जतीय और स्थानीय संकीर्णताओं से स्वत: मुक्त हो जते हैं। क्योंकि इससे पहले वे विविधता भरे भारतीय समाज में जीने के अयस्त होते हैं, इसलिए उन्हें गोरी नस्ल के आस्ट्रेलियाई लोगों के साथ भी रहने में कोई समस्या नहीं होती।

लेकिन अपेक्षाकृत बहुत कम विविधता वाले आस्ट्रेलिया जसे देश के लोगों की दिक्कत यह है कि उनके लिए वश्वीकरण के मायने पूंजी और प्रौद्योगिकी का विस्तार है। उस विस्तार में कहीं ताकत बढ़ती है और कहीं आनंद। लेकिन उसके भीतर जब तक विभिन्नता को आत्मसात करने की क्षमता नहीं होती, तब तक वह अधूरा होता है और इसी अधूरेपन से जन्म लेती है नस्लवादी ईष्र्या।

इसलिए आज जरूरत इस बात की है कि आस्ट्रेलिया जसा विशाल महादेश जिसे प्रकृति ने इतना कुछ दिया है, वह अपने युवाओं के भीतर संकीर्णता खत्म करने का प्रयास करे। इस काम में विदेशी और देशी छात्रों के विभिन्न समूहों के बीच रचनात्मक संवाद कायम करने और सरकारी निगरानी तेज करने से समस्या को हल करने में मदद मिल सकती है

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:नस्लवाद की आग