अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

पैर से लिखकर मौलवी की परीक्षा दे रही है इशरत जहां

जोश और जज्बा हो तो मंजिल दूर नहीं। इसे सच कर रही है पोठिया प्रखंड की इशरत जहां। वह पांव से लिखकर मौलवी की परीक्षा दे रही है। चकला स्थित मदरसे में परीक्षा दे रही इशरत की प्रतिभा देख दंडाधिकारी, केंद्राधीक्षक व अन्य छात्र-छात्राएं भी चकित हैं।

बेटी की प्रतिभा के कायल उसके पिता मो. इस्माइल उर्फ शमसुद्दीन गर्व से बताते हैं कि पांव से ही लिखकर इशरत ने प्रथम श्रेणी से फोकानियां की परीक्षा पास की थी और अब मौलवी (समकक्ष इंटर) की परीक्षा दे रही है। उसकी लिखावट काफी सुंदर है। इसके अलावा इशरत पेटिंग और कसीदाकारी जैसे कार्य भी वह पांव से बखूबी कर लेती है।
पोठिया प्रखंड के पोरलाबाड़ी पंचायत के हल्दीगांव निवासी इस्माइल को तब दुख हुआ था जब जन्म से ही इशरत के हाथ नहीं थे, लेकिन इशरत ने छोटी उम्र से ही पांव से कलम पकड़कर लिखने की कवायद शुरू की तो अब वह खुद को किसी हाथ वाले से कमतर नहीं मानती है। इशरत के लिए ये कोई बड़ी बात नहीं। वह हंसकर कहती है-‘खुशी होती है जब लोग मेरी प्रशंसा करते हैं।’ इशरत हजारों विकलांग बच्चों के लिए प्रेरणास्रोत है। 

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:जोश और जज्बा हो तो मंजिल दूर नहीं