DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

बढ़ी हुई फीस

निजी स्कूलों की फीस में वृद्धि के पक्ष में दिल्ली हाईकोर्ट का अंतरिम फैसला स्कूली बच्चों के अभिभावकों के लिए एक झटका है, लेकिन अदालत ने तो यह फैसला कानून के मद्देनजर ही किया होगा। अदालत के फैसले में कुछ राहत बच्चों और उनके अभिभावकों के लिए भी है- मसलन एरियर्स का भुगतान न करने पर कठोर कदम उठाने पर पाबंदी या स्कूलों के लिए यह शर्त है कि अगर अंतिम रूप से फैसला आने पर यह पाया जए कि स्कूलों ने ज्यादा पैसा लिया है तो उन्हें छात्रों को नौ प्रतिशत ब्याज के साथ पैसा लौटाना पड़ेगा।

यह बाद की बात है, लेकिन फिलहाल तो अभिभावकों को बोझ उठाने के लिए तैयार रहना चाहिए। अभी तो यही मामला अदालत में चलेगा लेकिन न यह पहली बार है न आखरी बार कि स्कूलों ने फीस बढ़ाई है और अभिभावकों ने विरोध किया है। इस मामले का स्थायी हल यही होगा और देर-सवेर इसे मानना ही होगा कि स्कूलों में फीस को लेकर कुछ नियम हों। इन दिनों निजी स्कूलों की फीस कुछ भी हो सकती है, जिसको लेकर कोई नियम नहीं हैं।

बाजर के सामान्य नियम इसे नियंत्रित इसलिए नहीं कर सकते, क्योंकि इसका अर्थशास्त्र सीधे-सीधे बेचने वाले के पक्ष में है। मंदी आए या मुद्रास्फीति, शिक्षा का बाजर कभी मंदा नहीं पड़ने वाला। इसके अलावा नियमन इसलिए भी जरूरी है कि शिक्षा में गुणवत्ता और एक स्तर पर समानता भी सुनिश्चित की ज सके।

दूसरा महत्वपूर्ण कदम यह उठाया जना जरूरी है कि सरकारी या सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों की संख्या बढ़ाई जए और उनकी गुणवत्ता सुधारी जए, ताकि कम से कम सामान्य मध्यम वर्ग के बच्चे उनमें पढ़ सकें। ऐसे स्कूल निजी स्कूलों की महत्वाकांक्षाओं और लोभ पर अंकुश लगाने का काम भी कर सकेंगे। अगर ऐसा नहीं हुआ तो विभिन्न वजहों से निजी स्कूलों की फीसें बढ़ती रहेंगी और हर बार स्कूल प्रबंधन और अभिभावकों के बीच टकराव बढ़ता रहेगा।

स्वास्थ्य और शिक्षा, इन दो क्षेत्रों में हमारे यहां कुछ ज्यादा निजीकरण भी हो गया है और दोनों क्षेत्रों में कोई नियमन भी नहीं है। इन दो क्षेत्रों में ज्यादा सरकारी पैसा खर्च करना दरअसल अपने नागरिकों और अपनी भावी पीढ़ी में निवेश करना है इसलिए यह अच्छा अर्थशास्त्र है। वरना नागरिकों पर बोझ भी बढ़ता रहेगा और अपेक्षित परिणाम भी नहीं मिलेंगे।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:बढ़ी हुई फीस