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मंदी ने उठाया पांच एसईजेड के अस्तित्व पर सवाल!

अप्रूवल मिलने के बाद भी निर्धारित वक्त के अंदर निर्माण सहित अन्य औपचारिकताएं पूरी नहीं करने पर साइबर सिटी के पांच स्पेशल इकोनॉमिक जोन(एसईजेड) को सूची से हटा दिया है। इससे न केवल आईटी, मल्टीप्रोडक्ट एसईजेड की परियोजना अधर में लटक गई है, बल्कि प्रदेश को करोड़ों का झटका लगने की भी आशंका जताई जा रही है।

गुड़गांव में कुल 73 एसईजेड प्रस्तावित है, जिनमें पचास से अधिक आईटी एसईजेड प्रस्तावित थे। आर्थिक मंदी के कारण न केवल कई निर्माण कार्य रुक गए, बल्कि कुछ एसईजेड प्रोजेक्ट को बदलने तक की नौबत आ गई। एडिशनल डायरेक्टर, एसईजेड आरके शर्मा ने बताया कि 20 को केन्द्र सरकार ने नोटिफाय कर दिया था, जबकि आठ को प्रदेश सरकार ने। इसके अलावा 22 एसईजेड के कंकरेंस मंत्रालय ने अप्रूव कर दिए हैं। इन प्रिंसिपल, साइबर सिटी में 11 एसईजेड को स्वीकृति मिल चुकी है, जबकि 19 ने इसके लिए आवेदन किए हैँ।

उन्होंने बताया कि पांच एसईजेड ऐसे हैं, जिन्होंने अप्रूवल मिलने के बाद भी निर्धारित समय सीमा के अंदर औपचारिकताएं पूरी नहीं की। ऐसे में उनकी मान्यता खत्म कर दी गई है। इसमें मेसर्स विपुल, मे. रॉकमैन, रहेज ग्रुप की एक परियोजना, श्री ओम जी डवलेपर्स व मेसर्स रोजवुड के नाम शामिल हैं। गुड़गांव में 73 एसईजेड का प्रस्ताव मिलने के बाद से इसे एसईजेड हब के नाम से जाना जाने लगा। उम्मीद की जा रही थी कि सभी एसईजेड का संचालन शुरू होने से न केवल प्रदेश सरकार के राजस्व में बढ़ोतरी होगी, बल्कि रोजगार की संभावना भी व्यापक वृद्धि होगी। जून में एसईजेड को लेकर होने वाली बैठक में विस्तृत चर्चा होने की उम्मीद है।

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