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नाभिकीय रिएक्टर

नाभिकीय रिएक्टर ऐसी डिवाइस हैं जिसमें नाभिकीय चेन रिएक्शन को नियंत्रित किया जाता है। नाभिकीय रिएक्टर का सबसे बड़ा इस्तेमाल विद्युत ऊज्रा उत्पन्न करने के  लिए किया जाता है। सामान्यत: सभी न्यूक्िलयर रिएक्टर नाभिकीय संलयन पर आधारित हैं जिसमें ईंधन के रूप में यूरेनियम का इस्तेमाल किया जता है।

प्रकार : नाभिकीय रिएक्टर कई प्रकार के होते हैं, प्रेशराइज्ड वाटर रिएक्टर (पीडब्लयूआर), बॉयलिंग वाटर रिएक्टर (बीडब्ल्यूआर), प्रेशराइज्ड हेवी वाटर रिएक्टर (पीडब्लयूएचआर), हेवी वाटर रिएक्टर, फास्ट ब्रीडर रिएक्टर, थर्मल रिएक्टर। थर्मल रिएक्टर में धीमे या थर्मल न्यूट्रॉन का इस्तेमाल किया जता है। सामान्यत: पावर रिएक्टर इसी पर आधारित होते हैं। फास्ट ब्रीडर रिएक्टर का इस्तेमाल नाभिकीय ऊज्र उत्पन्न करने के लिए किया जता है। रिएक्टर में मॉडरेटर (संलयन प्रक्रिया में न्यूट्रॉनों की बौछार को कम करने के लिए) के रूप में हेवी वाटर और ग्रेफाइट का इस्तेमाल किया जता है। रिएक्शन की दर कम करने के कैडमियम और बोरॉन की कंट्रोल राड का इस्तेमाल किया जता है।

कैसे करता है काम : यूरेनियम पर न्यूट्रॉन के कणों की बौछार की जती है जिससे यह कई भागों में टूट जता है। इस प्रक्रिया में कुछ ऊज्र मुक्त होती है। यह प्रक्रिया निरंतर चलती रहती है, जब तक इसे नियंत्रित न किया जए। नियंत्रित करने के बाद मुक्त हुई ऊज्र का इस्तेमाल स्टीम और टरबाइन चलाने में किया जता है। जिससे बिजली पैदा की जती है।

इतिहास : पहला न्यूक्लियर रिएक्टर वज्ञानिक एनरिको फर्मी ने शिकागो पाइल-1 नाम से बनाया था। असैन्य उद्देश्यों के लिए पहला न्यूक्िलयर पावर प्लांट 1954 में सोवियत यूनियन में स्थापित किया गया। भारत में तारापुर एटॉमिक पावर स्टेशन, राजस्थान एटॉमिक पावर स्टेशन, मद्रास एटॉमिक पावर स्टेशन, ककरपारा एटॉमिक पावर स्टेशन, कैगा एटॉमिक पावर स्टेशन, कुदनकुलम में पावर स्टेशन रिएक्टर हैं। वहीं कलपक्कम और ट्रांबे में संयंत्र हैं।

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  • Web Title:नाभिकीय रिएक्टर