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मिलावटी खाद्य पदार्थ की जांच में रुचि नहीं ले रहे हैं खाद्य निरीक्षक

नगर निगम के खाद्य निरीक्षक अब नगर स्वास्थ्य अधिकारी डा.बीके सिंह की नहीं सुनते। डा.सिंह के कड़े निर्देश के बावजूद वे न तो खाद्य पदार्थो की सैंपलिंग में रुचि ले रहे हैं और न ही मिलावटी खाद्य पदार्थ बेचने वालों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने के लिए पत्रावली दे रहे हैं।

इस बीच मंडलायुक्त सुरेश चंद्रा ने मिलावटी खाद्य पदार्थ बेचने वालों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने के लिए नगर स्वास्थ्य अधिकारी को अधिकार सौंपने के लिए चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव को चिट्ठी भेजी है। शासनादेश के मुताबिक खाद्य निरीक्षकों को हर महीने कम से कम पांच सैंपल लेना अनिवार्य है। इस तरह शहर के खाद्य निरीक्षकों को पांच महीने में कम से कम 25 सैंपल भरना था, लेकिन उन्होंने दिलचस्प नहीं दिखाई।

नगर निगम के खाद्य निरीक्षक जेपीएन चतुव्रेदी ने 6, केएन यादव ने 10, एएल राय ने 2, पल्टू मिÞा ने 2, टीबी सिंह ने 3, आरएस यादव ने 16, महेंद्र यादव ने 1, अकिल मसूद ने 3, रामजी भैया ने एक और मो.इशहाक व आरसी यादव ने कोई सैंपल नहीं लिया। खाद्य सैंपलिंग के 35 मामलों में मिश्रण की पुष्टि हुई है।

इन मामलों में आरोपितों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया जाना है। बताया जाता है कि नगर स्वास्थ्य अधिकारी डा.बीके सिंह ने तीन बार पत्र लिखकर खाद्य निरीक्षकों से पत्रावली मांगी, लेकिन उन्होंने दिया ही नहीं। इस बीच नगर आयुक्त डा.नंद किशोर ने नगर स्वास्थ्य अधिकारी से पूछा है कि खाद्य सैंपलिंग के कितने मामले पेंडिंग हैं।
खास यह है कि प्रयोगशाला की रिपोर्ट में मिलावटी खाद्य पदार्थ की पुष्टि होने के एक माह के अंदर आरोपितों के खिलाफ कोर्ट में मुकदमा दर्ज कराना जरूरी है।

नगर स्वास्थ्य अधिकारी के पास अधिकार न होने के कारण पिछले डेढ़ साल में किसी मामले में मुकदमा दर्ज नहीं हुआ। मंडलायुक्त सुरेश चंद्रा ने 22 मई 09 को शासन को पत्र लिखकर स्थायी नगर स्वास्थ्य अधिकारी की नियुक्ति होने तक डा.बीके सिंह को खाद्य अपमिश्रण अधिनियम 1954 के तहत इन्हें मुकदमा दर्ज कराने की अनुमति देने का आग्रह किया है। इससे पहले नगर आयुक्त डा.नंद किशोर ने इस बाबत शासन को चिट्ठी भेजी थी।

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  • Web Title:नगर स्वास्थ्य अधिकारी की नहीं सुनते खाद्य निरीक्षक