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सरकार पर नगर निगम को कंगाल बनाने का आरोप

वेतन अनुदान में राज्य सरकार द्वारा की गई कटौती, प्रोन्नति आदि मांगों को लेकर नगर निगम के कर्मचारियों ने मुख्य गेट पर शुक्रवार को प्रदर्शन किया और धरना दिया। आंदोलित कर्मचारियों का कहना था कि प्रदेश सरकार नगर निगम को कंगाल बनाने पर उतारू है। इसके चलते निगमों पर्याप्त अनुदान नहीं दिया जा रहा है। बनारस में स्थिति इसलिए अधिक गंभीर है क्योंकि यहां वेतन अनुदान व वसूली से प्राप्त धनराशि का उपयोग अन्य मद में कर दिया गया है।

नगर निगम कर्मचारी संघ के बैनरतले कर्मचारी एकत्र हुए और उन्होंने वेतन अनुदान में शासन द्वारा की गई भारी कटौती के विरोध में प्रदर्शन किया। सभी संवर्गो में प्रोन्नति, जीपीएफ और अन्य कटौतियों को खातों में डालने की मांग भी उठाई गई। धरना स्थल पर आयोजित सभा में वक्ताओं ने कहा कि राज्य वित्त आयोग ने स्थानीय निकाय कर्मचारियों के वेतन के लिए जो धनराशि आवंटित की थी उनमें से पांच नगर निगमों,लखनऊ, वाराणसी, कानपुर, इलाहाबाद और आगरा के वेतन अनुदान से बड़ी धनराशि काटकर जल संस्थानों का बकाया विद्युत बिल चुका दिया गया।

यह कटौती इस आधार पर की गई कि जल संस्थान का नगर निगम में विलय कर दिया गया है, जबकि सचाई इसके विपरीत है। शासन की मनमानी के चलते नगर निगमों के समक्ष वेतन की गंभीर समस्या पैदा हो गई है। इस मुद्दे को लेकर प्रदेश के सभी नगर निगमों में धरना और प्रदर्शन किया ज रहा है। धरना-प्रदर्शन में नगर निगम के सभी जोन के अधिकारियों और कर्मचारियों ने भाग लिया।

प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने जमकर नारेबाजी की और कहा कि वेतन अनुदान में कटौती के चलते कर्मचारियों को समय से वेतन नहीं मिल पा रहा है। इस मुद्दे को लेकर आंदोलन तेज किया जएगा। सभा की अध्यक्षता संगठन के जिलाध्यक्ष अमरनाथ प्रसाद और संचालन पवन कुमार सिंह ने किया। सभा में मनोज कुमार, रामलखन, विनायक मिश्रा, कैलाश नाथ, दिवाकर द्विवेदी, जावेद अख्तर, सीताराम केवट, कुंवर बहादुर लाल, राजेश गुप्त, लालजी सोनकर, रामजी कुशवाहा, जय सिंह आदि ने विचार व्यक्त किए।

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  • Web Title:वेतन अनुदान में कटौती के विरोध में प्रदर्शन