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प्रतिभाओं का पलायन

दिल्ली युनिवर्सिटी की ओर प्रतिभावान छात्रों का पलायन कोई नई बात नहीं है। इस स्थिति से बचने के लिए स्थानीय कालेज हर साल शिक्षा के स्तर में सुधार के लिए कुछ न कुछ नया करता है, लेकिन इसके बावजूद भी प्रतिभावान छात्र का पलायन जारी है। दिल्ली युनिवर्सिटी की तरफ छात्रों का झुकाव इसलिए होता है कि वहां का जो रुतबा है उसके आगे गुड़गांव के कालेज गौंड़ साबित होते हैं।

गुड़गांव के कालेजों में प्रतिभावान छात्रों का वह प्रतिशत दाखिला नहीं लेता बावजूद इसके कि पिछले कई सालों से लगातार गुड़गांव के छात्र सीबीएसई परीक्षाओं में बाजी मार रहे हैं। पिछले कई सालों से गुड़गांव के छात्र पहले स्थान पर रह रहे हैं, लेकिन फिर भी यहां के कालेजों में वह प्रतिभा नहीं आ पाती। इस बारे में महरौली रोड स्थित महिला महाविद्यालय के प्रिंसिपल जेपीएस चौहान कहते हैं कि उच्चतर शिक्षा में प्रतिभा पलायन के दो कारण हैं। पहला तो यह कि दिल्ली युनिवर्सिटी में दाखिले की प्रक्रिया मई में ही शुरू हो जाती है जबकि एमडीयू से संबंद्ध यहां के कालेजों में दाखिले जाकर जुलाई तक होते हैं। ऐसे में बच्चे रिजल्ट निकलने के तुरंत बाद से ही अपनी सीट सुरक्षित कर लेना चाहते हैं।

ऐसे में वह डीयू की तरफ रुख कर लेते हैं। दूसरा कारण बताते हुए वह कहते हैं कि बच्चों में यह सोच घर कर गई है कि डीयू में पढ़ लेने मात्र से काम नहीं चलता, वह कहते हैं कि बच्चे में यदि कैलीबर है तो कालेज का फर्क नहीं पड़ता, पढ़ाई यहां भी वही है, लेकिन छात्र इस प्रतिस्पर्धा भरे युग में कहीं से भी पीछे रहना नहीं चाहते इसलिए वह बाहर के कालेजों को प्राथमिकता देते हैं। सेक्टर नौ कालेज के प्रिंसिपल डॉ. अशोक दिवाकर कहते हैं कि यह प्रतिभा पलायन तब तक नहीं रुकेगा जब तक कि शिक्षा के स्तर को उठाने के लिए कोई व्यापक कदम नहीं उठाए जाते।

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