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17 फीसदी महिलाएं घरों में डिलीवरी करा रही हैं

साइबर सिटी की पहचान मेडिकल हब के रूप में देश-विदेश में हो रही है। कई बड़े कॉरपोरेट हेल्थ सेक्टर अपने अस्पताल यहां खोल चुके हैं तो कुछ खोलने की तैयारी में है। सरकारी अस्पताल भी मेडिकल हब में खुद के पैर मजबूत बनाने की मशक्कत कर रहा है। करोड़ों रुपये खर्च हो रहे हैं, लेकिन मेडिकल हब की एक सच्चाई यह भी है कि अभी भी यहां की 17 फीसदी महिलाएं घरों में डिलीवरी करा रही हैं। वर्ष 2008-09 में 48 फीसदी महिलाओं ने निजी अस्पतालों में डिलीवरी कराई है तो 35 फीसदी महिलाओं ने सरकारी अस्पताल का सहारा लिया। इसके अलावा 17 फीसदी महिलाओं ने घरों में ही डिलीवरी कराया। यह आंकड़ा स्वास्थ्य विभाग के द्वारा ही तैयार किया गया है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2008-09 में लगभग पांच लाख डिलीवरी हुई है, जिसमें 1.2 लाख डिलीवरी ही सरकारी अस्पतालों में की गई है।

गुड़गांव स्वास्थ्य विभाग के डिप्टी सिविल सर्जन डा. एसएस दलाल का कहना है कि 17 फीसदी घरों में होने वाली डिलीवरी में ग्यारह फीसदी डिलीवरी ट्रेंड दाई के द्वारा की गई, लेकिन विभाग के पास इस प्रश्न का कोई जवाब नहीं है कि जब जिले में 75 उप स्वास्थ्य केंद्र हैं। इसके साथ जगह-जगह डिलीवरी हट बनाए गए हैं तो फिर घर पर डिलीवरी कराए जाने का रिस्क महिलाएं क्यों ले रही है। हालांकि मालूम हो कि कई डिलीवरी हट की स्थिति काफी दयनीय है। चंद डिलीवरी हट ही ऐसे हैं, जहां महिलाएं डिलीवरी के लिए पहुंच रही है। अन्यथा कुछ डिलीवरी हट तो ऐसे हैं, जहां साल में एक भी डिलीवरी नहीं हुई है। जिले में 75 उप स्वास्थ्य केंद्र में से 34 के ही अपने भवन हैं बाकी के शेष निजी भवनों में किसी तरह से चलाए जा रहे हैं।

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