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घोटाले में व्यापार कर अफसर फंसे

 रेलवे के जरिये बुक कराकर लाये जाने वाले माल की तरफ से व्यापार कर महकमे ने आंखें बंद कर लीं और छह माह तक करोड़ों के टैक्स का चूना लगाया जाता रहा। महकमा जब चेता और आरोपी को तलाश करना शुरू किया तो उसका पता ही फर्जी निकला। इस मामले में व्यापार कर के कई अफसरों पर मिलीभगत की आशंका मानते हुए ईओडब्लू ने शासन को रिपोर्ट भेजी है। इसमें 25 करोड़ रुपये का घोटाला प्रकाश में आया है।

पूरा का पूरा मामला सिटी रेलवे स्टेशन और इसी रोड पर स्थित व्यापार कर की चौकी से जुड़ा है। करीब दस साल पहले यानी 1999 में दिल्ली से सुरेश कुमार नाम का व्यक्ति रेलवे के एसएलआर के जरिये माल लाता था। यह माल बाकायदा टैक्स पेयी होता था और यहां भी उसे व्यापार कर देना होता था। सुरेश कुमार ने रिकार्ड में अपना पता डी-151 किशनपुरा दर्ज कराया था। करीब छह माह तक इसी तरह से धंधा चलता रहा और व्यापार कर की चेकपोस्ट भी आंखें बंद किये रही। इस तरह से 1.87 करोड़ रुपये के व्यापार कर की चोरी कर ली गई। मामले में शिकायतें हुई तो महकमा जागा और फिर सुरेश कुमार की खोजबीन शुरू हुई कि आखिर वो माल किस तरह स्टेशन से लेकर जाता रहा? सुरेश का जो पता दर्ज कराया गया था, जांच में वो फर्जी निकला। सुरेश का जब कहीं पता नहीं चला तो यह मामला शासन तक पहुंचा। इस बीच टैक्स चोरी की रकम भी ग्यारह गुना बढ़ गई और करीब 25 करोड़ की देनदारी हो गई। आखिर शासन ने पिछले दिनों इस मामले की जांच आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन को सौंप दी। ईओडब्लू ने अपनी जांच पूरी कर ली।

सूत्रों का कहना है कि जांच रिपोर्ट में व्यापार कर के तत्कालीन अफसर को घोटाले के लिए शक के घेरे में लाया गया है। इसके साथ ही यह भी निष्कर्ष निकाला गया है कि सुरेश कुमार के पते पर फर्जी तरीके से रिकवरी नोटिस चस्पा किये जाते रहे। जब कि उस पते पर कोई सुरेश रहता ही नहीं था और न ही इस नम्बर का कोई मकान ही किशनपुरा में मिला। यह सब पूरे मामले में लीपापोती के लिए किया गया। इस मामले की जांच रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है।

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