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अरे देखो पप्पू पास हो गया..

केन्द्रीय मंत्रिमंडल में उत्तराखण्ड का प्रतिनिधित्व करने ज रहे राज्यमंत्री हरीश रावत को अपने मंत्री बनने की उतनी खुशी शायद ही होगी, जितनी खुशी उत्तराखण्ड के जनमानस को है। हरीश रावत के राज्यमंत्री बनने से कांग्रेस का झण्डा थामे पर्वतीय समाज को  राहुल गांधी के नेतृत्व में उम्मीद की किरणों दिखने लगी हैं। अब हरीश रावत को भी चाहिए कि वे देश के विकास के साथ-साथ उत्तराखण्ड के विकास और कांग्रेस पार्टी को मजबूत बनाने में अपना योगदान दें।

प्रमोद पंत, नई दिल्ली      

गठबंधन और परिवारवाद

लोकसभा चुनावों के बाद गठबंधन की सरकार तो बन गई परंतु मंत्रिमंडल में शामिल होने की लालसा के तले परिवारवाद का जो भोंपू बजया गया उसमें बाजी मारने वालों में डीएमके प्रमुख एम. करुणानिधि सबसे आगे रहे। आज भारतीय राजनीति की सबसे बड़ी समस्या ही गठबंधन की सरकार को चलाना है। तीन विवाह कर चुके करुणानिधि एक लम्बा चौड़ा कुनबा रखते हैं, जो भारतीय राजनीति में पूर्ण रूप से सक्रिय है व साथ ही जीत कर केन्द्र व राज्य में मंत्री पद की लालसा भी रखता है। उसे प्राप्त भी करता है। यूं तो परिवारवाद के नाम पर विभिन्न दल एक-दूसरे को कोसते देखे ज सकते हैं परंतु एक कटु सत्य यह भी है कि ये क्षेत्रीय दल परिवारवाद की छत्रछाया में पले-बढ़े व पनपे हैं।

अनूप आकाश वर्मा, नई दिल्ली

नौटंकीबाजों से सावधान

15वीं लोकसभा के गठन में केवल नौ सीटों के लिए बागी नेता बिना शर्त के समर्थन देने को तैयार हैं। तैयार तो दागी भी हैं। मेरा कहना है कि नवगठित सरकार में कोई भी दागी  मंत्री पद ग्रहण न कर पाए, जनता ने इनको नकार दिया है। कृपया ऐसे दलों से भी समर्थन न लें जो जरा-जरा सी बात पर सरकार को गिराने का प्रयास करे। उन पार्टियों से भी समर्थन न लें, जो केवल सत्ता सुख के लिए धन बल-बाहुबल द्वारा सरकार को कमजोर करने का दबाव बनाए रखते हैं। बाहर से समर्थन देने वालों को भी शामिल न करें।

शशिप्रभा शर्मा, हापुड़ ,गाजियाबाद

प्रेम जी दाता एक नाम

कहावत है कि ‘लोग अपने घर में दीया जला कर तब मंदिर में जलाते हैं।’ परंतु विप्रो के प्रमुख अजीम प्रेमजी ने वश्विक मंदी के चलते-चलते खुद अपने ही वेतन में कटौती करके कर्मचारियों के वेतन में बढ़ोतरी की। आपका जिगरा बहुत बड़ा है। वरना कंपनी मालिक को तो अपने फायदे के एवज में कर्मचारियों की पगार ही दिखाई देती है। अजीम प्रेमजी आप मिसाल कायम करते हुए दूसरों के लिए भी आदर्श बन गए हैं। आपको अपने इस त्याग का मीठा फल अवश्य मिलेगा।

राजेन्द्र कुमार सिंह, रोहिणी, नई दिल्ली

हिम्मत जो है बुलंद

हिम्मत जो है बुलंद तो
कुछ उससे काम ले।
छुप-छुप के कैसे देखता है,
हाथ थाम ले।।

अशोक, नई दिल्ली

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