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टॉपर्स की खबर प्रथम तीन

कुछ भी नहीं होता असंभव : कल्की कुकरेज (98)

ट्राईसिटी की टॉपर कल्की कुकरेज का मानना है कि कुछ भी असंभव नहीं होता। इम्पॉसिबल शब्द में ही आई एम पॉसिबल छिपा है। यही मेरी सफलता का मूल मंत्र रहा और इसी पर केंद्रित होकर मैं हर काम करती हूं, और सफलता मिलती जती है। चंडीगढ़-पंचकूला-मोहाली में सबसे अधिक अंक पाने वाली इस छात्रा का मानना है कि सफल वही होता है जो अच्छा इंसान होता है। पढ़ाई के साथ ही कल्की इंटर स्कूल लेवल पर डिबेट और डिक्लेमेशन की कई प्रतियोगिताएं जीत चुकी हैं। संगीतकार एआर रहमान की फैन कल्की जब पढ़ते-पढ़ते थक जती है तो उसे सॉफ्ट म्यूजिक सुनना काफी अच्छा लगता है। भविष्य की योजना के बारे में कल्की का कहना है कि वह आईआईटी के जरिए कम्प्यूटर साइंस में इंजीनियरिंग करना चाहती है।

मां-बाप के पदचिन्हों पर चलेगी हरसिमरन (97.8)


ट्राईसिटी में दूसरा स्थान हासिल करने वाली हरसिमरन भाटिया अपने माता-पिता के पदचिन्हों पर चलते हुए एक सफल डॉक्टर बनना चाहती है। हरसिमरन की इच्छा न्यूरोसजर्न बनने की है। सेंट ऐनीज स्कूल-32 की शान हरसिमरन बचपन से ही टॉपर रही है। अपनी सफलता के पीछे छिपे राज के बारे में हरसिमरन कहती हैं कि पढ़ाई में रेगुलर रहना ही उसके काम आया। पढ़ाई के अलावा स्कूल की डिसिप्लीन मास्टर और पार्लियामेंट मेंबर के तौर पर भी उसने अपनी पहचान कायम की है। डिबेट में माहिर हरसिमरन को बेस्ट स्पीकर का अवार्ड मिल चुका है, उसे दो बार बेस्ट एकेडमिक्स का भी सम्मान मिला है। अपनी मां को रोल मॉडल मानने वाली हरसिमरन कहती हैं कि जिस तरह उनकी मां ने डॉक्टरी पेशे के साथ घर के कामकाज के बीच सामंजस्य बनाया है, वह अपने आप में अनुकरणनीय है।

कॉमर्स में हाथ आजमाएगी अनुराधा (97.8)


ट्राई सिटी में संयुक्त रूप से दूसरे नंबर पर काबिज अनुराधा गुप्ता कॉमर्स के क्षेत्र में हाथ आजमाना चाहती है। अनुराधा का कहना है कि बदलते वश्विक परिदृश्य में कॉमर्स में संभावनाएं काफी अधिक हैं, ऐसे में इस क्षेत्र में अलग मुकाम बनाना ही मेरा लक्ष्य होगा। इस हरफनमौला छात्रा का कहना है कि वह पढ़ाई के अलावा जिम में अधिक समय बिताना पंसद करती है। नॉवल या अन्य कॉमिक्स की किताबें पढ़ना उसे काफी अच्छा लगता है। मौका मिलने पर वह फिल्में भी देखती है। दोस्तों के साथ खुशियां मनाने में वह पीछे नहीं रहती। अपनी इस सफलता का श्रेय वह अपने माता-पिता और शिक्षकों को देती है।

किरण बेदी से प्रभावित है शगुन (97.6)


ग्रेटर चंडीगढ़ की थर्ड टॉपर शगुन प्रथम आईपीएस अफसर किरण बेदी से बेहद प्रभावित हैं और भविष्य में उनकी तरह की दमदार शख्सियत बनना चाहती हैं। उसका कहना है कि जिस तरह से किरण ने खेल के साथ अपने काम में संतुलन बनाया, वह अपने आप में अनुकरणनीय है। शगुन फिलहाल मेडिकल कोर में पढ़ते हुए डॉक्टरी की डिग्री लेगी, लेकिन आगे चलकर आईएएस बनने की भी वह सपने सहेजे हुए है। सफलता के मंत्र के तौर पर उसका कहना है कि अब जमाना ‘वर्क स्मॉर्ट नॉट हार्ड’ का है। सफलता ज्यादा पढ़ने से नहीं बल्कि पढ़े हुए पाठ को लगातार दोहराते रहने से मिलती है। यही मैंने सीखा और इस पर अमल कर इस मुकाम तक पहुंची। पेंटिंग के अलावा टीवी पर गाने सुनना शगुन को काफी अच्छा लगता है।

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