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सुबोधकांत कैबिनेट मंत्री बने, कांग्रेसी खुश, झामुमो में निराशा

झारखंड के इकलौते कांग्रेसी सांसद सुबोधकांत सहाय को कैबिनेट मंत्री बनाये जाने से कांग्रेस में जहां जश्न है, वहीं झमुमो सुप्रीमो शिबू सोरेन को मंत्रिमंडल में तरजीह न दिये जने से पार्टी में निराशा है। पिछले एक दशक में केंद्र में बनी तीन सरकारों में झारखंड को इतना कम प्रतिनिधित्व नहीं मिला।

यह पहला दफा है जब आदिवासी बहुल राज्य से किसी आदिवासी को ही मंत्री नहीं बनाया गया है। उम्मीद की जा रही थी कि जिन राज्यों में इस वर्ष के अंत या 2010 की पहली तिमाही में चुनाव होना है, वहां से केंद्रीय कैबिनेट में ज्यादा प्रतिनिधित्व मिलेगा। लेकिन झारखंड के साथ ऐसा नहीं हुआ।

झारखंड में कांग्रेस-झामुमो ने चुनाव पूर्व गठबंधन किया था। देशभर में कांग्रेस के शानदार प्रदर्शन के बाद उम्मीद जतायी जा रही थी कि झारखंड में पार्टी के पुराने साथी शिबू सोरेन को भी केंद्रीय मंत्रिमंडल में जगह दी जायेगी। झामुमो के वरिष्ठ नेता सह सूबे के पूर्व उप मुख्यमंत्री सुधीर महतो ने कांग्रेस आलाकमान से मांग भी की थी कि शिबू सोरेन को भी मंत्रिमंडल में शामिल किया जाये। दरअसल आंकड़ों की गणित में शिबू पिछड़ गये। इस बार लोकसभा चुनाव में झामुमो को मात्र दो सीटें मिली। कांग्रेस का भी इस बार झरखंड में लगभग सफाया हो गया। सिर्फ सुबोधकांत सहाय ही यहां पार्टी की प्रतिष्ठा बचा सके।

सुबोधकांत सहाय के शपथ ग्रहण करते ही झारखंड में जश्न का माहौल है। उन्हें मंत्री बनाये जने से झारखंड के लोगों को उम्मीद जगी है कि केंद्र सरकार इस पिछड़े राज्य पर ध्यान देगी। केंद्र में सुबोधकांत की अच्छी पकड़ से यह भी आशा बंधी है कि वह कुछ नयी योजनाएं यहां लायेंगे, ताकि सूबे का सही ढंग से विकास हो। पर सवाल उठ रहा है कि वोट की राजनीति के दृष्टिकोण से सुबोधकांत क्या राज्य के हर क्षेत्र और समुदाय का प्रतिनिधित्व कर पायेंगे।

इससे पूर्व 2004 में बनी मनमोहन सिंह की सरकार में झारखंड से दो मंत्री रहे। शुरुआत में सुबोधकांत सहाय और शिबू सोरेन और बाद में शिबू की जगह रामेश्वर उरांव ने ली। उससे और पहले जयें तो 1999 में बनी अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में भी झरखंड से तीन मंत्री थे, यशवंत सिन्हा, कड़िया मुंडा और बाबूलाल मरांडी। वर्ष 2000 में झारखंड का गठन होने पर मरांडी मुख्यमंत्री बन कर दिल्ली से रांची आ गये। 

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  • Web Title:पहली बार झारखंड से कोई आदिवासी मंत्री नहीं