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परिणाम कहीं बच्चे की जान न ले ले

 दसवीं परिणाम, करियर की और पहला पड़ाव, ऐसे में हर माता-पिता का अपने बच्चों से कुछ अपेक्षाएं जुड़ी होती हैं। बच्चे अगर अपेक्षाएं पूरी न कर पाए तो तनाव के चलते दिमाग में खुद को खत्म करने के विचार उमड़ते हैं। नतीजा कुछ ऐसी चीज की तलाश जो जिंदगी से नाता तोड़ दे। बच्चों को ऐसा करने से बचाने के लिए यूटी पुलिस ने तो मंगलवार को कमान संभाल ली, लेकिन अभिभावक अभी भी इसे समझने में नाकाम हैं कि बच्चे से जरूरत से अधिक उम्मीद उसके लिए जानलेवा हो सकती है।

सुखना पर रही तैनाती


पिछला पुलिस रिकॉर्ड देखा जए तो परिणाम अच्छे न आने के चलते कुछ बच्चों ने सुखना में जाकर जान देने की कोशिश की है। कुछ कामयाब हुए तो कुछ के इरादे नाकाम कर दिए गए। इस विकट स्थिति को देखते हुए यूटी प्रशासन ने यूटी पुलिस से परिणामों के दौरान सुखना लेक पर तैनाती सख्त करने के आदेश दिए। इसी का परिणाम रहा कि परीक्षा परिणामों के दौरान यूटी पुलिस सुखना के चप्पे-चप्पे पर नजर लगाए बैठी है। पुलिस आंकड़ों के अनुसार साल 2008 में चार लोगों ने खुदकुशी करने की कोशिश की। पुलिस प्रवक्ता राम दयाल ने बताया कि अक्सर इन मौकों पर सुखना पर तैनाती रहती है। मंगलवार को सारा दिन एसएचओ वहीं रहे हैं।

क्या कहती है स्टडी


इसी बात को मद्देनजर रखते हुए जीएमसीएच-32 के साइकेट्री विभाग ने पांच सरकारी व गैर सरकारी स्कूलों में 10वीं से लेकर 12वीं कक्षा के छात्रों पर शोध किया। परिणाम आया कि अधिकतम छात्र तनाव के शिकार हैं और अक्सर उनके मन में खुद को खत्म करने के विचार उमड़ते हैं। मनोचिकित्सक डॉ. बीएस चवन ने बताया कि 100 बच्चों में छह में से इस तरह की टेंडेंसी देखी गई है, जिसमें लड़कियों की गिनती अधिक है।

मनोचिकित्सकों की राय


डॉ. बीएस चवन के अनुसार अपने बच्चों से अधिक अपेक्षा न करें, हर बच्चे का आईक्यू लेवल अलग होता है। परीक्षा परिणामों के लिए उन पर दवाब न बनाएं। बच्चे अगर बाहर जाकर खेलना या दोस्तों के साथ समय बिताना चाहते हैं तो उन्हें रोके नहीं। अगर आपको लग रहा है कि आपका बच्च पहले से गुमसुम हो रहा है, दोस्तों से नहीं मिल रहा, सबसे कटा रहता है तो मनोचिकित्सक की सहायता तुरंत लें। हो सकता है कि उसके मन में खुद को नुकसान पहुंचाने के ख्याल उमड़ रहे हों। परिणाम ठीक न आने पर बच्चे का दूसरों के साथ तुलना न करें। उन्हें प्रोत्साहित करें और आगे बढ़ने के रास्ते बताएं।

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