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परमाणु परीक्षण

हाल में उत्तरी कोरिया द्वारा परमाणु परीक्षण करने के बाद परमाणु शक्ित के बारे में फिर से बहस गर्म हुई है। बीसवीं सदी में कई देशों ने परमाणु परीक्षण किए थे। पहला परमाणु परीक्षण अमेरिका ने 16 जुलाई 1945 में किया था जिसमें 20 किलोटन का परीक्षण किया गया था। अब तक का सबसे बड़ा परमाणु परीक्षण सोवियत रूस में 30 अक्तूबर 1961 को किया गया था जिसमें 50 मेगाटन के हथियार का परीक्षण किया गया था।

परमाणु परीक्षण कई तरह के होते हैं। हवा, जलगत और भूमिगत। हवा में किए जने वाले परीक्षण खुले और निजर्न इलाके में या धरातल से कुछ ऊपर किए जते हैं। आमतौर पर ऐसे परीक्षणों में उपकरण को ऊंची इमारतों, गुब्बारों, द्वीपों में या हवाई जहाज से गिराकर परीक्षण किया जता है। इनके अलावा, आज तक रॉकेटों से दागकर भी कुछ परमाणु परीक्षण किए ज चुके हैं। विस्फोट से उपजे मशरूम क्लाउड में आसपास की चीजें खिंची चली आती हैं और इसकी डिबरियों से रेडियोधर्मिता आसपास के क्षेत्र में फैलती है।

जलगत परीक्षण : इस तरह के परीक्षण किसी जहाज या नौका की मदद से किए जते हैं। इन परीक्षणों को शत्रु की नौसेना के जहाजों और पनडुब्बियों से मुकाबले की दृष्टि से किया जता है। इसके अतिरिक्त, समुद्री युद्ध में काम आने वाले हथियारों जसे टॉरपीडो या डेप्थ चाजर्र्स के शक्ित परीक्षण के लिए भी किया जता है। तट के पास किए जने वाले जलगत परीक्षणों से पानी में काफी रेडियोधर्मी तत्व मिल जते हैं जो आसपास के जहाजों और समुद्री जन-जीवन के लिए बहुत घातक होते हैं।

भूमिगत परीक्षण : ऐसे परीक्षण पृथ्वी की सतह में गड्ढा खोदकर या अन्य तरीके से किए जते हैं। अमेरिका और सोवियत रूस ने शीत युद्ध के दिनों में अक्सर ऐसे ही परीक्षण किए थे। 1963 में इसके अतिरिक्त अन्य परीक्षणों को लिमिटेड टेस्ट बैन ट्रीटी पर पाबंदी लगा दी गई थी। जब ऐसे परीक्षण संपन्न होते हैं तो उसमें इस्तेमाल किए गए सामान से भूकंप का खतरा हो सकता है। अन्यथा इनसे खतरा कम रहता है।

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