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उत्तर प्रदेश की उपेक्षा से कार्यकर्ताओं में मायूसी

उत्तर प्रदेश की उपेक्षा से कार्यकर्ताओं में मायूसी

केंद्रीय मंत्रिपरिषद में उत्तर प्रदेश को अपेक्षित प्रतिनिधित्व न मिलने से कांग्रेस कार्यकर्ता खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं। लोकसभा चुनाव में प्रदेश की 80 में से 21 सीटें जीतकर कांग्रेस ने अप्रत्याशित प्रदर्शन किया था, लेकिन प्रदर्शन के अनुरूप प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की मंत्रिपरिषद में प्रदेश को प्रतिनिधित्व नहीं मिला। राजनीतिक रूप से सबसे अहम इस प्रदेश से किसी भी नेता को कैबिनेट मंत्री का दर्जा नहीं मिला है।

केंद्रीय मंत्रिपरिषद में उत्तर प्रदेश के पांच सांसदों को प्रतिनिधित्व मिला है। इनमें दो को राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और तीन को राज्यमंत्री का दर्जा दिया गया है। श्रीप्रकाश जायसवाल को पदोन्नत कर राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बनाया गया है। सलमान खुर्शीद की फिर से मंत्रिपरिषद में वापसी हुई है। उन्हें भीराज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बनाया गया है। प्रदेश के जिन तीन सांसदों को राज्यमंत्री का दर्जा मिला है उनमें जितिन प्रसाद, आर. पी. एन. सिंह और प्रदीप जैन शामिल हैं।

बहरहाल, प्रदेश के कांग्रेस कार्यकर्ता यह उम्मीद लगाए बैठे थे कि इस बार 21 सीटें जीतने के बाद भागीदारी के हिसाब से कम से कम प्रदेश के 9 सांसदों को मंत्रिपरिषद में जगह  मिलेगी लेकिन ऐसा हुआ नहीं। कार्यकर्ताओं में इसे लेकर नाराजगी जरूर देखी जा रही है लेकिन कोई भी खुलकर बोलने से डर रहा है।

कांग्रेस की प्रदेश इकाई की अध्यक्ष रीता बहुगुणा जोशी भी कह चुकी हैं कि प्रदेश में कांग्रेस ने जिस तरह का प्रदर्शन किया है उसके हिसाब से कम से कम नौ जनप्रतिनिधियों को मंत्रिपरिषद में मौका मिलना चाहिए। कांग्रेस के एक नेता ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि देश को आठ प्रधानमंत्री दे चुके इस राज्य के किसी एक भी नेता को कैबिनेट मंत्री नहीं बनाया जाना दुखद है।

इस नेता ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री नरसिंह राव के जमाने में उत्तर प्रदेश के नेताओं को पीछे रखने की एक सोची-समझी चाल चली गई थी, लेकिन आज सोनिया गांधी और राहुल गांधी के रहते उत्तर प्रदेश की उपेक्षा की उम्मीद नहीं थी। उत्तर प्रदेश कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता अखिलेश प्रताप सिंह ने कहा कि मंत्रिपरिषद में पांच जनप्रतिनिधियों को शामिल किया गया है। इसके अलावा सोनिया और राहुल गांधी भी तो यूपी से ही हैं।

राजनीतिक हलकों में कहा जा रहा है कि लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में पार्टी को जो अप्रत्याशति सफलता मिली है उसे बरकरार रखने के लिए कांग्रेस कोराजनीतिक रूप से सबसे अहम इस प्रदेश पर ध्यान देना होगा और यहां के नेताओं को आगे लाना होगा।

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