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छोटा, सुखी परिवार

हमारे यहां कई लोगों को इस बात से ऐतराज है कि हिंदुओं पर एक ही विवाह करने की पाबंदी है और मुसलमान चार विवाह कर सकते हैं। वे चाहते हैं कि या तो हिंदुओं को चार विवाह करने की इजजत दी जए या मुसलमानों पर भी एक विवाह की पाबंदी लगा दी जए। वे पहला विकल्प ज्यादा पसंद करते हैं, हालांकि यह मांग करनेवाले ज्यादातर लोग वे हैं, जो एक भी शादी नहीं करते।

वे अपने और अपने समाज के चरित्र की रक्षा अपनी तरह से करते हैं। वह एक अलग मुद्दा है, लेकिन इनका कहना यह है कि इस तरह मुसलमान अपनी जनसंख्या हिंदुओं के मुकाबले चार गुना तेजी से बढ़ाते हैं। उनका कहना है कि शादी के अलग-अलग नियम होने की वजह से बराबरी की प्रतिस्पर्धा नहीं हो पाती।

वे ऐसी कल्पना करते हैं कि अगर हिंदू भी चार शादियां कर सकें तो फिर हो जए मुकाबला, कौन ज्यादा बच्चे पैदा करता है। हालांकि आरएसएस के एक पूर्व सरसंघचालक ने हिंदुओं का आह्वान किया था कि वे एक पत्नी के रहते भी मुसलमानों से प्रतिस्पर्धा बहादुरी से करें, ज्यादा से ज्यादा बच्चे पैदा करके दिखाएं।

बहरहाल, पूर्व सरसंघचालक की सलाह उन लोगों ने भी शायद नहीं मानी, जो इंटरनेट पर उग्र हिंदुत्ववादी संदेश लिखते रहते हैं और अन्य धर्मावलंबियों और छद्म धर्मनिरपेक्षतावादियों को ऐसी गालियां लिखते रहते हैं कि वरुण गांधी का चेहरा भी शर्म से लाल हो जए। बात मुद्दे से जरा भटक गई है। यह सब मुङो याद आया एम. करुणानिधि के प्रसंग में। करुणानिधि ने तीन शादियां कीं। जहिर है कि उनका भरा-पूरा परिवार है। करुणानिधि चाहते हैं कि उनका परिवार देश को चलाने की जिम्मेदारी ले ले।

वे अपने तमाम बेटे- बेटियों नाती-पोतियों को मंत्री बनाना चाहते हैं। जब वे चुनावों के बाद दिल्ली आए तो उनकी दो जीवित पत्नियां (पहली पत्नी दिवंगत हो गई हैं) अपने-अपने बच्चों को केन्द्रीय मंत्रिमंडल में पद दिलवाने के लिए साथ आईं, ऐसा बताया जता है। इसके अलावा उनके नाती भी हैं, जिन्हें मंत्री बनाने के लिए करुणानिधि की बेटी का दबाव है। फिर करुणानिधि इतने भी स्वार्थी नहीं हैं कि सिर्फ अपने परिवार वालों को ही मंत्री बनाना चाहें, वे पार्टी के दूसरे नेताओं को भी मौका देना चाहते हैं।

इस तरह करुणानिधि का बस चले तो सारा केन्द्रीय मंत्रिमंडल तमिलनाडु के नेताओं से भर जए, प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के लिए कोने में शायद थोड़ी सी जगह छूट जए। प्रधानमंत्री इस बात के लिए तैयार नहीं हैं। ऐसे में करुणानिधि क्या करें, किस पत्नी को नाराज करें, किस बेटी को नाराज करें, किस बेटे को नाराज करें। न प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह न ही वे पूर्व सरसंघचालक यह बात समझ सकते हैं। क्या देश के सामने यह समस्या आती, अगर करुणानिधि ने एक ही शादी की होती। एक शादी करना और कम बच्चे होना हर दृष्टि से ठीक है, क्या इससे यही सिद्ध नहीं होता, मेरे हिंदुत्ववादी भाइयों।

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