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बुढ़ापे का सहारा

दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा 80 साल की बुजुर्ग महिला के तीन बेटों को मां की देखरेख करने का फर्ज याद दिलाना इस बात का प्रमाण है कि समाज में बेहद करीबी रिश्ते भी निष्ठुर हो गए हैं। अदालत पहले भी ऐसे फैसले सुना चुकी है। कुछ समय पहले कोर्ट ने आदेश दिया था कि बूढ़े माता-पिता की जिम्मेदारी उठाना लड़का-लड़की दोनों का दायित्व है और वे इससे बच नहीं सकते। इसके बावजूद औलाद घर के बुजुर्गो को या तो कई बार नजरअंदाज करती है या रामभरोसे छोड़ देती है। इन दिनों कई घटनाएं हुई हैं जो दिखा रही हैं कि अपने स्वार्थवश बच्चे माता-पिता को भी बोझ समझने लगते हैं।

वृद्धावस्था में जब उन्हें सबसे ज्यादा औलाद के सहारे की जरूरत होती है, तब उन्हें वृद्धाÞामों में या कहीं भी यूं ही बेसहारा छोड़ दिया जता है। उम्र के साथ-साथ शंकित और सामथ्र्य में कमी आने लगती है, इसे पहले की तरह स्वीकार करने की बजए  परिवार का हर सदस्य उनके व्यवहार और आचरण के प्रति शिकायती रुख अपना लेता है। उन्हें अनुपयोगी समझ उनसे किसी भी तरह छुटकारा पाना चाहता है।

इससे उलट मां-बाप के कितने भी बच्चे हों, वे आज भी कई कष्ट उठाकर और अपना पेट काट कर भी सबको प्यार से पालते हैं। कोई बच्च कितना भी नालायक क्यों न हो, वे उसे अपने से अलग करने की बात सोच भी नहीं सकते, लेकिन  दुख की बात है कि बड़े होने पर यही बच्चे मिलकर भी अपने माता-पिता का उत्तरदायित्व नहीं निभा सकते। ऐसी औलाद माता-पिता की संपत्ति पर तो अपना अधिकार जताती है, लेकिन उनके प्रति अपना फर्ज भूल जती है।

इन पारिवारिक झगड़ों पर अदालती फैसलों के सामने आने से समस्या की गंभीरता का पता चलता है। भारत ही नहीं पूरी दुनिया में जिस तेजी से बूढ़ों की संख्या बढ़ रही है, उससे स्थिति आगे और गंभीर हो सकती है। परिवार में उपेक्षित बुजुर्गो को रोज-रोज के अपमान से बचाने और उनके स्वास्थ्य व सुविधाओं का ध्यान रखने के लिए देश में ज्यादा संख्या में वृद्धाÞाम खोले जने की जरूरत है।

सरकार की पहल पर बैंकों ने ‘रिवर्स मॉरगेज’ का प्रावधान शुरू किया है, जिसके तहत जिनके पास अपना मकान है, वे उसे बैंक को गिरवी रखकर बदले में पैसा ले सकते हैं और उस मकान में रहते हुए उस पैसे से अपना जीवन-यापन कर सकते हैं। उनकी मृत्यु के बाद अगर उनके बच्चों को वह मकान चाहिए तो बैंक का कज्र और ब्याज चुकाकर वापस ले सकते हैं। बुढ़ापे में सुख-शांति से रहने के लिए ऐसे ही और उपायों पर भी गौर करना जरूरी है।

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