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निर्माण कार्य बनाम पक्षी प्रेमी

नोएडा सेक्टर-15 और 16ए में, यमुना किनारे पांच पार्को में हो रहे दलित स्मारक के निर्माण के पक्ष में नोएडावासी नहीं हैं। एक पक्षी-प्रेमी, सेक्टर 15ए निवासी ने कहा है कि निर्माण के कारण ओखला पक्षी विहार में पक्षियों के आगमन में काफी कमी आई है। मेरी समझ में यह नहीं आता कि एक स्मारक के पार्क के निर्माण से पक्षियों के आगमन से बाधा पहुंच रही है तो यमुना के किनारे बन रहे स्पोर्ट्स कॉम्पलेक्स से पक्षियों को कितनी बाधा हो रही होगी। पार्क तो पार्क है चाहे उसमें हाथियों की मूर्तियां लगा दो, या अन्य किसी जीवों की, फायदा तो निवासियों को ही होना चाहिए।

राजेन्द्र कुमार सिंह, रोहिणी, दिल्ली

बांग्लादेशियों के वकील?

कभी रामविलास पासवान ने बांग्लादेशी घुसपैठियों को भारत की नागरिकता देने की वकालत की थी। तो अब हाजीपुर की जनता ने बता दिया कि वे इसके सख्त विरोधी हैं और साथ में जनता ने उनकी संसद सदस्यता भी छीन ली। शायद उन्हें अपनों से ज्यादा बांग्लादेशियों की चिंता अधिक है। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और नीतीश कुमार को चाहिए कि अब वे उन घुसपैठियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई कर उन्हें देश से भगाएं।

विजय कुमार, आर के पुरम, नई दिल्ली

नॉन प्लेइंग कैप्टन राहुल गांधी

इस बार युवाओं का हाथ कांग्रेस के साथ रहा। सांप्रदायिक दलों को धूल चटाने वाली कांग्रेस ने दिल्ली और उत्तराखंड में तो भारतीय जनता पार्टी का सूपड़ा साफ कर दिया और हरियाणा में एक बार फिर परचम लहराते हुए भारतीय संसद में सबसे बड़े दल के रूप में उभरी है। विभिन्न राज्यों में पार्टी ने काफी अच्छा प्रदर्शन किया। राहुल गांधी जनते हैं कि जमीन से जुड़ कर ही राजनीतिक लड़ाई लड़ी ज सकती है। काफी समय से उत्तर प्रदेश में घर-घर घूम कर सुर्खियां बटोर रहे राहुल गांधी ने सचमुच प्रदेश में दिन-प्रतिदिन ढल रही कांग्रेस को युवा कर दिया है।

अनूप आकाश वर्मा,  नई दिल्ली

भाषा को मान्यता मिले

समृद्ध राजस्थानी भाषा को मान्यता का मुद्दा संसद में टलते ज रहा है। राजस्थान के सांसदों द्वारा इस मुद्दे को संसद में प्रभावी ढंग से कभी नहीं उठाये जने और संबंधित मंत्रियों की जनकारी के अभाव के कारण समृद्ध और विश्व भर में फैले 10 करोड़ राजस्थानियों द्वारा व्यवहरित यह भाषा अभी तक संविधान की आठवीं सूची में शामिल नहीं है। अब राजस्थान से निर्वाचित सभी सांसद इस विषय पर एकमत होकर संबंधित मंत्री से मिलकर और संसद में जोरदार ढंग से उठाकर इसी सत्र में घोषणा करने के लिए सरकार को बाध्य करें। तभी समृद्ध और शब्दों के भंडार से भरपूर राजस्थानी भाषा को उसका वास्तविक अधिकार मिल पाएगा। सभी राजस्थानी सांसद शीघ्र प्रयास करें।

अरुण गनेड़ीवाला, जमशेदपुर

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