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दो टूक

यह तो होना ही था। बिजली के दाम बढ़ाने का प्रस्ताव आना ही था। लोड शेडिंग बहाल होनी ही थी। पानी की सप्लाई को फिर से ठप होना ही था। मार्केट में दुकानों की सीलिंग फिर से शुरू होनी ही थी। हाउस टैक्स बढ़ाने का विचार भी आना ही था। चुनाव जो निपट गए।

जीतने वाले  जीत गए। हारने वाले हार गए। हारने वाले इसलिए आंसू पोंछने नहीं आएंगे कि हार गए। जब कुर्सी ही नहीं तो मदद कैसी? जीतने वाले इसलिए नहीं सुध लेंगे कि जीत गए। वोट चाहिए था, सो मिल गया। अब क्यों खाली-पीली वक्त जया करें। वोट की लूट हो चुकी भाई साहब। अब चुपचाप रहिए। चार दिन की चांदनी थी। अगले चुनाव तक रातें अंधेरी ही रहेंगी।

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