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राष्ट्रीय पैमाने पर कहां खड़ा है झारखंड?

सरप्लस बजट वाला झारखंड आज कहां खड़ा है? विकास के राष्ट्रीय औसत से हम कितने पीछे हैं। सरकारी आंकड़े ही हमें मुंह चिढ़ा रहे हैं। पुराने आंकड़ों को छोड़ भी दें तो वर्ष 2002-03 से 2008-09 तक हमने विकास योजनाओं पर 20832 करोड़ रुपये खर्च किये हैं, पर विकास के पायदान पर किसी भी क्षेत्र में (सड़क, बिजली, पेयजल, स्वास्थ्य और शिक्षा) राष्ट्रीय औसत को प्राप्त नहीं कर सकें। न सिर्फ हम बहुत पीछे हैं बल्कि काफी पीछे हैं।

ये आंकड़े किसी एनजीओ के नहीं, योजना आयोग के हैं जिसने इंस्टीट्यूट फॉर ह्यूमन डेवलपमेंट एजेंसी से तैयार कराया है। फिर झारखंड सरकर को कुछ दिन पूर्व उसे उपलब्ध कराते हुए साफ-साफ कहा है कि गरीबी दूर करनी है, जनता को बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध करानी है तो इस पर ध्यान देना होगा। जनता की जरूरतों से जुड़े इन क्षेत्रों पर वारफुट पर योजनावद्ध तरीके से काम करना होगा।


सड़क    (आंकड़े प्रतिशत में)
विषय     झारखंड  राष्ट्रीय
सभी मौसम में सड़कों से गांवों का जुड़ाव 36  57
गांव जिससे मेटल की सड़कें जुड़ी है 25  45
1000 वर्ग किमी में सड़क की लंबाई 414  768
1000 लोगों पर सड़क किमी में  1.23  2.56
बिजली
घरों में पहुंची बिजली   40.2  67.9
प्रति व्यक्ति बिजली खपत (‘६ँ)  30  373
गांवों तक पहुंची बिजली   26.03  79.92
पेयजल स्वच्छता
स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता  42.7  78
घरों में शौचालय की व्यवस्था  22.6  44.6
कृषि
प्रति हेक्टेयर खाद्य उत्पादन (किग्रा में) 1073  1715
कुल भूमि का कृषि योग्य जमीन  22.7  46
कृषि योग्य भूमि में सिंचाई की सुविधा  8.9  39.6
शिक्षा
साक्षर महिलाएं    46.7  58.5
साक्षर पुरुष    71.8  78.1
लड़के जो स्कूल जते (6-17 वर्ष) 63.8  71
लड़कियां जो स्कूल जती (6-17 वर्ष) 56.5  66.4
स्वास्थ्य
एक पीएचसी पर गांवों की संख्या  58.1  27.6
नवजत मृत्यु दर    68.7  57
बाल मृत्यु दर    26.1  18.4
अस्पतालों में होनेवाला जन्म  18  39

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