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बत्तखों के प्रजनन के अनुकूल साबित हो रहा है भीमताल

नैनीझील में बत्तखों की प्राकृतिक रूप से तादाद नहीं बढ़ रही है, जबकि भीमताल इसके लिए मुफीद साबित हो रहा है। इसके लिए यहां बढ़ता प्रदूषण जिम्मेदार हो सकता है। हालांकि नगर पालिका प्रशासन अब पंतनगर विवि के विशेषज्ञों से इस विषय में राय लेने की बात कह रहा है।

नैनीझील में झुंड में तैरती बत्तखें अपनी अलग ही छटा विखेरती  हैं। अंग्रेजों के बसाए इस शहर की झील में आजदी के बाद ही बत्तखों को लाया गया था। झील की सफाई में योगदान व खूबसूरती को बढ़ाने के लिए यह प्रयोग किया गया। इसकी सभी ने तारीफ की। पालिका ने झील के मध्य किनारे में स्थापित लाईब्रेरी के नीचे इनके लिए बकायदा शेड भी बनाया है। बत्तखों के दाने की व्यवस्था होटल एसोसिएशन के सहयोग से की जती है।

बताते हैं कि एक दशक पहले तक इनकी तादाद लगभग एक सौ तक पहुंच गई थी, लेकिन इसमें तेजी से कमी दर्ज की गई और 2008 आने तक इनकी संख्या मात्र 15 रह गई। कुछ लोग अंडों के चोरी चले जने को इसका कारण मानते हैं।

इधर पालिका ने गत साल ही  बाहर से 50 बत्तखों को मंगा कर झील में डाला है। पालिका के अधिशाषी अधिकारी रोहित शर्मा ने बताया कि बत्तखों की वंश वृद्धि को लेकर पालिका सजग है। प्रथम दृष्ट्या अंडे सेने के लिए अनुकूल तापमान नहीं होना, इसका कारण बताया जा रहा है, लेकिन पंतनगर विवि के विशेषज्ञों से सहयोग लेकर इसका हल निकालने पर पालिका विचार कर रही है।

उधर, भीमताल में नाव चालकों ने बत्तखों का जिम्मा ले रखा है। नाव चालक समिति के  अध्यक्ष पंकज गिरी ने बताया कि डेढ़ दशक पहले 20-22 बत्तखें यहां झील में रखी गई थी तब से इनकी तादात बढ़ कर 30 हो गई है।

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  • Web Title:नैनीझील में नहीं बढ़ रही है तादाद