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वजनी हथौड़े भी नहीं तोड़ सके ब्रिटिशकालीन सड़क

चौकाघाट में फ्लाई ओवर के लिए खुदाई में मिली ब्रिटिशकालीन सीमेंट की सड़क को तोड़ने की कोशिश दूसरे दिन भी नाकाम रही। बुधवार को निर्माण कार्य में लगे श्रमिकों ने घन (बड़ा हथौड़ा) से सड़क को तोड़ने का प्रयास किया। फ्लाईओवर बनाने वाली कंपनी ने सीमेंटेड सड़क को तोड़ने के लिए पोकलेन मशीन मंगाई है। यदि सड़क इसे भी न टूटी तो कंप्रेशर मशीन मंगाई जाएगी।


फ्लाईओवर का निर्माण कार्य चौकाघाट से शुरू हुआ है। संपूर्णानंद संस्कृत विवि की बाउंड्री से सटकर काम चल रहा है। पिलर खड़ा करने के लिए मंगलवार को की जा रही खोदाई के दौरान ब्रिटिश काल में बनी सीमेंट की सड़क दिखाई दी। कंपनी के कर्मचारियों ने इस सड़क को जेसीबी से तोड़ने की कोशिश की, लेकिन बात नहीं बनी। बुधवार को भार-भरकम हथौड़ों से सीमेंटेड सड़क को तोड़ने का प्रयास किया गया, मगर सड़क में दरार तक नहीं आई।

ब्रिटिश काल की सड़क  मौजूदा सड़क से करीब छह फीट नीचे है। फ्लाईओवर का पिलर खड़ा करने के लिए सड़क से करीब 14 मीटर नीचे तक खुदाई की जानी है। कंपनी के इंजीनियरों ने बताया कि सीमेंट की सड़क को तोड़े बगैर पिलर की पाइलिंग नहीं हो सकेगी, इसलिए पोकलेन मशीन मंगाई गई है। यह मशीन अगर सफल नहीं होगी तो कंप्रेशर मशीन अथवा बारूद से ब्लास्ट करके सीमेंट की सड़क को तोड़ा जाएगा।


फ्लाईओवर बनाने वाली कंपनी एनकेजी इंफ्रास्ट्रक्चर के इंजीनियरों के मुताबिक चौकाघाट से कैंट के बीच 38 स्थानों पर पिलर्स खड़े किए जएंगे। हर पिलर्स में 16-16 पाइलिंग होगी। उन्होंने बताया कि सीमेंटेड सड़क सिर्फ चौकाघाट पुल तक है। इसके आगे सड़क मुड़ गई है, सो खुदाई में आगे आसानी होगी। उन्होंने बताया कि चौकाघाट से कैंट रेलवे स्टेशन के पास तक फ्लाईओवर का निर्माण किया जाना है। परियोजना पर करीब 27 करोड़ 46 लाख 97 हजार खर्च होंगे और इसे मई 2010 तक पूरा किया जाना है।

 

 

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