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रंग लाया पांच सप्ताह तक चला आंदोलन

भुल्लनपुर में देशी शराब के ठेके के विरोध में पांच सप्ताह से जरी आंदोलन बुधवार को रंग लाया। एक दिन पूर्व क्रमिक अनशन पर बैठी महिलाओं के साथ मारपीट के बाद प्रशासन चेता। अंतत: ग्रामीणों के इरादों की जीत हुई। आबकारी निरीक्षक संजय सिंह ने घोषणा की है कि ठेका नहीं खुलेगा। ग्राम प्रधान रामा देवी के नेतृत्व में आंदोलन कर रहे ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि दोबारा ठेका खोलने का प्रयास किया गया तो उग्र आंदोलन होगा।

उधर, प्रदर्शनकारी महिलाओं के साथ मारपीट व कपड़े फाड़ने के आरोपित ठेकेदार के गुर्गो को पुलिस नहीं पकड़ सकी है। मंदिर और स्कूल के पास भुल्लनपुर में 20 अप्रैल को देशी शराब की दुकान खोली गई थी, जिसके विरोध में ग्रामीणों ने 22 अप्रैल को प्रदर्शन किया। ठेकेदार ने अपने पक्ष में शराब के शौकीनों को जुटा लिया तो मामले ने तूल पकड़ लिया। पुलिस ने ठेका बंद कराने से इनकार कर दिया तो ग्रामीण डीएम के पास पहुंच गए। कुछ दिनों तक बंद रहने के बाद शराब का ठेका दोबारा खुला तो ग्रामीणों ने विरोध-प्रदर्शन किया। महिला ग्राम प्रधान रामादेवी के नेतृत्व में शराब की दुकान के खिलाफ आवाज बुलंद की गई।

पिछले एक सप्ताह से ग्रामीणों का दुकान के सामने क्रमिक अनशन चल रहा था। ठेका खुलने के हालात नहीं नजर आए तो मंगलवार की शाम ठेकेदार के सशस्त्र गुर्गो ने आंदोलनकारी महिलाओं को पीटा और उनके कपड़े भी फाड़ दिये। इससे गुस्साए ग्रामीणों ने मंडुवाडीह थाने का घेराव किया। आला अधिकारियों के निर्देश पर गुर्गो के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज हुई लेकिन किसी की गिरफ्तारी न हो सकी।


मामला तूल पकड़ता देख बुधवार को काशी विद्यापीठ के ब्लाक प्रमुख छक्कन मौैर्या, शहीद भगत सिंह यूथ बिग्रेड के प्रदेश अध्यक्ष बबलू मौर्या समेत कई लोग ग्रामीणों के समर्थन में अनशन स्थल पर पहुंचे। मौके पर आकर आबकारी इंस्पेक्टर ने ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि शराब ठेका यहां नहीं खुलेगा। इसे दूसरे स्थान पर स्थानांतरित किया जएगा। प्रदर्शनकारियों में भाईलाल, पतिराज, सच्चेलाल, देवानंद, राजेन्द्र, मुन्नीदेवी, रत्नेश कुमारी, राजकुमारी, इंद्रावती, मीरा, चंद्रावती, शीला आदि ग्रामीण थे।

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