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सांसदों के परिजनों को टिकट देने से परहेज करेगा जदयू

पति की जगह पत्नी या बाप की जगह बेटे को टिकट देने की परम्परा को जदयू आगे नही बढ़ाएगा। विधायकों के सांसद बन जने के कारण विधानसभा की 17 सीटें खाली हुई हैं। इन सीटों पर देर-सवेर चुनाव होना है। अन्य दलों की बात अलग है। मगर जदयू इन रिक्त सीटों पर कार्यकर्ताओं को ही उम्मीदवार बनाएगा। इससे पहले इस्लामपुर के जदयू विधायक रामस्वरूप प्रसाद नालंदा से सांसद बने तो उन्होंने इस्लामपुर के लिए अपने बेटे की दावेदारी पेश की। जदयू ने उनके दावे को खारिज कर दिया।


सूत्रों ने बताया कि रिक्त सीटों पर सांसदों के परिजनों के बदले कार्यकर्ताओं को उम्मीदवार बनाया जएगा। जदयू के नौ विधायक इसबार संसद में चले गए हैं। ये हैं-विश्वमोहन कुमार (त्रिवेणीगंज), वद्यनाथ प्रसाद महतो (नौतन), पूर्णमासी राम  (बगहा), अश्वमेघ देवी (कल्याणपुर), अजरुन राय (औराई), डा. मोनाजिर हसन (मुंगेर), जगदीश शर्मा (घोसी), भूदेव चौधरी (धोरैया) एवं दिनेशचंद्र यादव (सिमरी बख्तियारपुर)। इसके अलावा राजद विधायक महाबली सिंह (चैनपुर) और लोजपा विधायक महेश्वर हजरी (वारिसनगर) भी जदयू के टिकट पर सांसद बने। जदयू के ललन पासवान (चेनारी) विधानसभा से इस्तीफा देकर राजद के टिकट पर चुनाव लड़े। इस लिहाल से जदयू के खाते में विधानसभा की 12 सीटिंग सीटें हैं। इन सीटों पर कार्यकर्ताओं को टिकट दिया जएगा। हालांकि चैनपुर और वारिसनगर की सीटों को लेकर भाजपा भी उत्साहित है। क्योंकि पिछले चुनाव में ये दोनों सीटें भाजपा के कोटे की थी। चुनाव में भाजपा के भी तीन विधायक-भोला प्रसाद सिंह (बेगूसराय), प्रदीप सिंह (अररिया) और हरि मांझी (बोधगया) सांसद बन गए।


भाजपा में अभी यह तय होना बाकी है कि सांसदों के परिजनों या कार्यकर्ताओं में से किसे टिकट दिया जएगा। मगर उम्मीद की ज रही है कि भाजपा भी परिवारवाद को बढ़ावा नहीं देगा। इसलिए कि लोकसभा चुनाव में वोटरों ने परिवारवाद को पसंद नहीं किया। इसे बढ़ावा देनेवाले नेता धराशायी हुए।

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