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एटीएस के गठन में जुटी सरकार

 बिहार में आतंकी टेरर को काउंटर करने के लिए राज्य सरकार ने अपना गुप्त मिशन शुरू कर दिया है। स्पेशल टास्क फोर्स को एटीएस(आतंक निरोधी दस्ता) की भूमिका में तैयार किया जा रहा है। हैदराबाद के ‘ग्रे हाउंड’ से ट्रेनिंग लेकर आए एसटीएफ के जवानों में से चुनिंदा जांबाजों को एटीएस में शामिल किया जा रहा है।

इसके अलावा स्पेशल ब्रांच के कुछ अफसर इसमें शामिल किए जाएंगे। राज्य में एटीएस का सेटअप अलग होगा। इसके गठन के लिए महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और उत्तरप्रदेश पैटर्न को आधार बनाकर आला पुलिस अधिकारियों ने होमवर्क भी किया है। एटीएस कैसे काम करेगा इसका खाका लगभग तैयार कर लिया गया है।  इसमें कई टीमें होंगी। खास बात यह होगी कि एटीएस और एसटीएफ को एक अलग एजेंसी के  रूप में तैयार करने की योजना है जिसके मुखिया के तौर पर अलग से एडीजी स्तर के एक अधिकारी की नियुक्त होगी।

बिहार में एटीएस स्वतंत्र होकर काम करेगा। कानूनी रूप से उसे इतना सशक्त बनाने की योजना है कि गुप्त मिशन पर जाने से पहले उसे किसी से आदेश लेने की जरूरत न पड़े। सूत्रों के अनुसार एटीएस के गठन की पूरी प्रक्रिया पर गुप्त मिशन के तहत काम हो रहा है। एटीएस में शामिल एक टीम हमले की सूचना मिलते ही मौके पर ऑपरेशन के लिए तैयार रहेगी। दूसरी टीम घटना स्थल से नमूने इकठ्ठा करेगी। तीसरी टीम हाईटेक उपकरणों की मदद से आतंकियों द्वारा इस्तेमाल में लाए गए विस्फोटकों और तकनीक का अध्ययन करेगी और चौथी टीम गिरफ्तार आतंकियों का इंटेरोगेशन करेगी। इंटोरेगेशन के लिए अलग कक्ष होगा।

साइबर क्राइम, ईमेल ट्रैकिंग और मोबाइल फॉरेंसिक और फॉरेंसिक सायंस के विशेषज्ञ भी इसमें शामिल किए जाएंगे। सूत्रों के अनुसार महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और उत्तरप्रदेश की एटीएस के पास कौन सी नई टेक्नोलॉजी है या नए हथियार हैं, राज्य पुलिस मुख्यालय उसका अध्ययन कर रहा है

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