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मॉनीटरिंग सिस्टम ठीक करने की बैंकों को सलाह

 सरकार की पहल पर राज्य के बैंकों ने किसान क्रेडिट कार्ड और शिक्षा लोन देने में तो कुछ उदारता दिखाई है लेकिन जमा-साख अनुपात नहीं बढ़ा सके। शिविर लगा कर नौ लाख किसानों को इस बार केडिट कार्ड बांटे गये। विभिन्न बैंकों ने 23348 छात्रों को शिक्षा लोन के रूप में 577 करोड़ रुपये दिये।

यह पूर्व के सालों से बहुत अधिक है। बावजूद सीडी रेसियो 30.46 प्रतिशत ही रह गया। बुधवार को स्टेट लेबल बैंकर्स कमेटी (एसएलबीसी) की 28वीं बैठक में उप मुख्यमंत्री और वित्त मंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा कि राज्य के बैंकों में 83047.56 करोड़ रुपये जमा हैं जबकि लोन के रूप में केवल 25293.56 करोड़ रुपये ही बांटे गये। उन्होंने बैंकों को ब्रांच वाइज मॉनीटरिंग करने की सलाह दी और रिजर्व बैंक के प्रतिनिधि को भी व्यवस्था दुरुस्त करने को कहा। उन्होंनें कहा कि यूको और इलाहाबाद जैसे खराब प्रदर्शन करने वाले बैंकों के बारे में वे केन्द्र सरकार तथा उनके अधिकारियों को लिखेंगे।


बैठक में अधिकारियों ने  मोदी को बताया कि इस वर्ष राज्य में लगभग एक हजार नये एटीएम लगाये जाएंगे। अकेले स्टेट बैंक अपने एटीएम की संख्या में पांच सौ की वृद्धि करेगा। मोदी ने 24 जून को केसीसी वितरण के लिए फिर से शिविर लगाने की तिथि तय की और कहा कि उस दिन बैंकों के बड़े अधिकारियों को किसी न किसी स्थान पर शिविर में रहना चाहिए। जिलों के प्रभारी मंत्रियों से भी ऐसा करने का कहा जाएगा। जिला कंसलटेटिव कमेटी की बैठकें नहीं होने पर भी उन्होंने आपत्ति जताते हुए पूरे राज्य में एक दिन यह बैठक करने की सलाह दी।

इसके लिए तिथि तय की गई 13 जून। उसी दिन अपराह्न् में डिस्ट्रिक्ट लेबल रिव्यू कमेटी (डीएलआरसी) की भी बैठक होगी। कृषि और संबद्ध क्षेत्रों में ऋण देने के लिए एक टास्क फोर्स के गठन की सलाह भी उन्होंने दी। साथ ही कहा कि लीड बैंक स्कीम के अध्ययन के लिए भी एक सब कमेटी होनी चाहिए।  पूरी बैठक में  मोदी और बैंक के उपस्थित अधिकारियों के बीच लुकाछिपी का खेल चलता रहा। बैंक के अधिकारी अपनी कमियों को छुपाने की कोशिश करते रहे लेकिन सभी आंकड़े साथ लेकर बैठक में आए  मोदी की नजर से कुछ भी बचना आसान नहीं था।

केसीसी के बारे में उन्होंने यह भी कहा कि हम अब भी यह लक्ष्य से पीछे है। सूबे में 13 लाख किसानों के लोन माफ हुए लेकिन नौ लाख को ही नया ऋण दिया गया। बैठक में वित्त, ग्रामीण विकास और खाद्य विभाग के प्रधान सचिवों के अलावा कई अन्य विभागों के वरीय अधिकारी और सभी बैंकों के प्रमुख अधिकारी उपस्थित थे।

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