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डब्लूसीसीबी ने तस्करी पर अंकुश लगाने के लिए कसी कमर

देश की अन्तरराष्ट्रीय सीमाएँ वाइल्ड लाइफ क्राइम का गढ़ बन चुकी हैं। दुनिया में प्रतिवर्ष 20 विलियन डॉलर का वन्य जीवों का अवैध कारोबार हो रहा है। वन्य जीवों की तस्करी पर अंकुश लगाने के लिए वाइल्ड लाइफ कंट्रोल ब्यूरो ने कमर कस ली है। अन्तरराष्ट्रीय सीमाओं पर तैनात सुरक्षा एजेंसियों को प्रशिक्षित कर क्राइम को रोकने की कवायद शुरू कर दी है।

भारत सरकार की ओर से गठित नई दिल्ली स्थित वाइल्ड लाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो के उपनिदेशक रमेश पाण्डेय बुधवार को बहराइच आए। वन विभाग के डाक बंगले में बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि वाइल्ड लाइफ क्राइम ने संगठित रूप धारण कर लिया है। देश की अन्तरराष्ट्रीय सीमाएँ वन्य जीव अपराधों की गढ़ बन चुकी हैं।

भारत में अनेक वन्य जीव जन्तु ऐसे हैं जिनका उत्पाद तो यहाँ होता है किन्तु यहाँ के लोगों को उनका मूल्य ही पता नहीं है। इन वन्य जन्तुओं की अधिकांश खपत विदेशों में होती है। खासकर दक्षिण एशिया व दक्षिण पूर्व एशिया के देशों में वन्य जीवों की तस्करी के लिए संगठित गिरोह काम कर रहे हैं। जिनका नेटवर्क अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर है।

उन्होंने बताया कि हाई सिंथ मकाऊ नाम के पक्षी के प्रति जोड़े की कीमत 50 लाख रुपए होती है, जिसकी जनकारी लोगों को है ही नहीं। भारत में फिलहाल बाघ, तेंदुआ, गैंडा जैसे जनवरों की तस्करी को ही लोग जानते हैं जबकि कई ऐसे जन्तु हैं जो अत्यन्त दुर्लभ हैं और उनकी कीमत हजरों से लेकर लाखों तक में होती है जिसमें सेंट बोवा साँप, सियार, फ्राग, नेवला समेत अन्य जन्तु शामिल हैं इनकी वन्य जीवों की तरफ लोगों का आसानी से ध्यान ही नहीं जाता है। विदेशों में इन दुर्लभ जन्तुओं के खरीददारों की भरमार है।

जन्तुओं का उपयोग भोजन, दवाएँ बनाने, कीमती कास्मेटिक के सामान व अन्य वस्तुओं के निर्माण में किया जता है। इन जन्तुओं की प्रजाति का नाम लेते ही अनेक खरीददार सामने आ जाते हैं। उन्होंने बताया कि भारत सरकार ने वन्य जीवों की तस्करी को गंभीरता से लेते हुए वर्ष 2007 में वाइल्ड लाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो का गठन किया है।

देश की विभिन्न अन्तरराष्ट्रीय सीमाओं पर तैनात सुरक्षा एजेंसियों को राष्ट्र द्रोही तत्वों से सीमा की सुरक्षा करने के साथ ही ब्यूरो की ओर से इस बात के लिए भी जगरुक किया ज रहा है कि भारत के जंगलों में मौजूद जंगली जीव जन्तु कितने मूल्यवान हैं और वह पर्यावरण की किस तरह सुरक्षा कर रहे हैं।

उन्हें बचाना राष्ट्र हित में कितना आवश्यक है। इसके लिए ब्यूरो की ओर से पाकिस्तान की सीमा पर तैनात बीएसएफ, चीन की सीमा पर तैनात आईटीबीपी, बांग्लादेश की सीमा पर तैनात आसाम रायफल्स, नेपाल व भूटान की सीमा पर तैनात एसएसबी के जवानों को प्रशिक्षित कर वाइल्ड लाइफ क्राइम को नियंत्रित करने की मुहिम शुरू की गई है।

इसी क्रम में वह भारत-नेपाल सीमा पर तैनात एसएसबी के जवानों को प्रशिक्षित करने के लिए नानपारा में होने वाली कार्यशाला को सम्बोधित करने के लिए बहराइच आए हैं। यहाँ से वह दुधवा जएँगे जहाँ 28 व 29  मई को एमओवी डब्लूटीआई, वन विभाग व एफएडब्लू के सहयोग से आयोजित वर्कशाप को सम्बोधित केंगे। जिसमें भारत के अलावा नेपाल के भी वन अधिकारी भाग लेंगे। इस कार्यशाला का समन्वय भारत सरकार कर रही है।

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  • Web Title:वाइल्ड लाइफ क्राइम का गढ़ बनी अन्तरराष्ट्रीय सीमा