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फिल्म समीक्षा: ‘99’

फिल्म समीक्षा: ‘99’

निर्देशक जोड़ी- राज निदिमुरू, कृष्ण  डी.के
कलाकार- कुणाल खेमू, सोहा अली खान, बोमन ईरानी, महेश मांजरेकर, साइरस ब्रोचा

दोनों दिल्ली के होटल में रूकते हैं जहां सचिन की मुलाकात दिल्ली की पारंपरिक लड़की पूजा (सोहा अली खान) से होती है। सचिन को पूजा भा जाती है। दोनों राहुल से पैसा लेकर मुम्बई लौटने जाते ही हैं कि पैसा चोरी हो जाता है। दोनों फिर राहुल के साथ ही एक मैच फिक्स करने की कोशिश करते हैं,नहीं तो डॉन ‘एजीएम’ उनकी छुट्टी कर देगा।

फिल्म ‘99’ एक हास्य-थ्रिलर फिल्म का एक बेहतरीन उदाहरण है। कहानी को देखकर लगता है जैसे यह वास्तव में हुआ हो।

फिल्म में बोमन ईरानी की भूमिका मजाकिया है। कुणाल खेमू और साइरस ब्रोचा की भूमिका भी दमदार है। फिल्म में डॉन बने महेश मांजरेकर ‘भाई’ कम मजाकिया ज्यादा लगे हैं।

फिल्म के कुछ दृश्य हंसा-हंसाकर लोटपोट कर देते हैं,हालांकि फिल्म थोड़ी छोटी होती तो बेहतर होता। कुल मिलाकर कहा जाए तो एकबार ‘99’ देखना बुरा अनुभव कतई नहीं होगा।

आईपीएल क्रिकेट तथा मल्टीप्लेक्स  और निर्माताओं के विवाद के बीच निर्देशक जोड़ी- राज निदिमुरू और कृष्ण डीके. की फिल्म ‘99’ मोबाइल फोन, सट्टे और मैच फिक्सिंग पर आधारित हास्य फिल्म है।

फिल्म की प्रमुख भूमिका में हैं साइरस ब्रोचा, कुणाल खेमू, सोहा अली खान और बोमन ईरानी। 

फिल्म की कहानी दो लड़कों सचिन (कुणाल खेमू) और जरामड (साइरस ब्रोचा) की है, जो मोबाइल फोन के नकली सिम कार्ड बनाने का धंधा करते हैं। एक दिन वे एक महंगी मर्सडीज कार चुरा लेते हैं और उसे एक खंबे में ठोक देते हैं। कहानी यहां से एक अलग मोड़ लेती है,क्योंकि कार एक डॉन की होती है। दोनों यहां से लोकल डॉन ‘एजीएम’ (महेश मांजरेकर) के साथ काम करने लगते हैं,मजबूरी में।

डॉन एजीएम (महेश) सचिन (‍कुणाल) और जरामड (साइरस) को नई दिल्ली के राहुल (बोमन ईरानी) का काम सौंपता है और उससे पैसे की उगाही के लिए दोनों को दिल्ली भेज देता है। राहुल (बोमन) मैच फिक्सिंग में हजारों कमाता है,लेकिन लाखों गंवाता है।   

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