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पुलिस-प्रशासन हारा, कांग्रेसी जीते

पूरे 19 साल तक चले मुकदमे में पुलिस-प्रशासन को हार का मुंह देखना पड़ा और बाजी कांग्रेसियों के हाथ लगी। वर्ष 1990 में जन समस्याओं को लेकर कलक्ट्रेट में तोड़फोड़ और डीएम कार्यालय में हंगामे के मामले में न्यायालय ने नामजद कांग्रेसियों को रिहा कर दिया।

कांग्रेस के 88 नेताओं और कार्यकर्ताओं पर नाई की मण्डी थाने में यह मुकदमा 22 अगस्त 90 को दर्ज हुआ था। जब जन समस्याओं को लेकर कांग्रेसियों ने कलक्ट्रेट में प्रदर्शन करते हुए जमकर तोड़फोड़ कर डाली थी। फर्नीचर को तहस नहस करते हुए कांग्रेसियों ने डीएम कार्यालय में भी जमकर हंगामा मचाया था। तब पुलिस ने तत्कालीन जिलाध्यक्ष, शहर अध्यक्ष, पूर्व सांसद, पूर्व विधायकों समेत 88 लोगों को नामजद किया था। जिसमें इनके खिलाफ धारा 147, 353, 427 के साथ 7 क्रिमिनल लॉ अमेंडमेंट एक्ट के तहत एफआईआर करायी गयी। जिसमें बहुत से नेताओं को पुलिस ने मौके से ही गिरफ्तार किया था। पूरे 19 साल तक चले मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की तरफ से मात्र चार गवाह ही अदालत में पेश किये गये। इस बीच 14 कांग्रेसी स्वर्ग सिधार गये। अभियोजन पक्ष द्वारा कांग्रेसियों के विरुद्ध मामला सिद्ध न कर पाने के कारण अपर सिविल जज डा. शालिनी सिंह ने 74 आरोपियों को बरी करने के आदेश दिये। कांग्रेसियों की पैरवी उनके अधिवक्ता रमाशंकर शर्मा ने की। सोमवार को सुबह से ही दीवानी में कांग्रेसियों का जमावड़ा शुरू हो गया। अधिकांश नामजद नेता न्यायालय के समक्ष पेश हुए। जबकि अन्य कांग्रेसजन न्यायालय के बाद फैसले का इंतजार करते रहे। फिर न्यायालय द्वारा रिहाई के बाद कांग्रेसजनों का दीवानी परिसर में जोरदार स्वागत किया गया।

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