अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

राजस्व संकट ने प्रणब की मुश्किलें बढ़ाईं

राजस्व संकट ने प्रणब की मुश्किलें बढ़ाईं

आर्थिक चुनौतियों के इस महासंकट काल में सरकारी खजने ने वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। इसके चलते जहां एक ओर उद्योग को टैक्स प्रोत्साहन देना काफी कठिन साबित हो रहा है, वहीं दूसरी ओर घरेलू मांग को दुरुस्त करने के लिए सरकारी व्यय बढ़ाना भी चुनौतीपूर्ण हो गया है। लिहाज, फिलहाल सरकार ने घरेलू मांग बढ़ाने की दिशा में नया फामरूला निकाला है। इसके तहत निजी निवेश की हालत ठीक होने तक सरकारी कंपनियों की विस्तार योजनाओं पर जोर दिया जएगा।

जुलाई माह में पेश होने ज रहे आम बजट की तैयारी के समय वित्त मंत्री के सामने अप्रैल और मई माह के दौरान के राजस्व संग्रह वाले आंकड़े होंगे। इसके आधार पर ही वह सरकारी व्यय का हिसाब और कर प्रोत्साहनों का लेखाजोखा तय करेंगे। यह उनके लिए मुश्किल की घड़ी साबित होना तय है। इसकी दो वजहें हैं।

पहली, चालू वित्त वर्ष के पहले अप्रैल माह के दौरान प्रत्यक्ष टैक्स संग्रह सिर्फ 15.1 फीसदी बढ़ सका है और यह 18,969 करोड़ रुपये पर पहुंचा है लेकिन बीते वित्त वर्ष के रिफंड ज्यादा होने से शुद्ध संग्रह उल्टे 3.2 फीसदी और घटकर 12,239 करोड़ रुपये के स्तर पर गया है। कॉरपोरेट टैक्स सिर्फ 21.4 फीसदी बढ़ा है और इनकम टैक्स महज 11.8 फीसदी। दूसरी वजह और भी चिंताजनक यह है कि कॉरपोरेट टीडीएस यानी स्रोत पर टैक्स कटौती का ग्राफी तेजी से गिरा है। ऐसी गंभीर हालत में निजी क्षेत्र का निवेश हाल-फिलहाल पटरी पर लौटता नहीं दिख रहा है।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:राजस्व संकट ने प्रणब की मुश्किलें बढ़ाईं