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तेज गाड़ी दौड़ायी तो स्पीड राडार के प्रिंट संग चालान

अब वाहन मालिकों को यह कहने का मौका नहीं मिलेगा कि पुलिस ने 35 किलोमीटर की गति को 45 दिखाकर चालान कर दिया। ट्रैफिक पुलिस वाहन स्वामी को चालान के साथ ही स्पीड राडार से स्पीड प्रिंट भी देगी। यातायात निदेशालय ने ट्रैफिक पुलिस को प्रिंटर वाले स्पीड राडार के साथ कुछ अन्य उपकरण दिये हैं। सोमवार को ट्रैफिक लाइन में पुलिस कर्मियों को ये उपकरण चलाने का प्रशिक्षण दिया गया।

इस बार यातायात निदेशालय से लक्स मीटर भी दिया गया है। यह कार के शीशों की पारदर्शिता जांचेगा। साइड स्क्रीन में पारदर्शिता 50 फीसदी से ज्यादा तथा विंड स्क्रीन में 75 फीसदी से ज्यादा होनी चाहिये। इससे कम पर चालान होगा। रिहायशी क्षेत्रों में 35, हाई-वे पर 60 और शेष क्षेत्रों में 45 की रफ्तार से गाड़ी चलायी जा सकेगी। ट्रैफिक पुलिस के पास अब सात स्पीड राडार, 18 ब्रीथ एनालाइजर, एक लक्स मीटर, वाहनों की जांच के लिए दो गैस एनालाइजर, 160 सेफ्टी लाइट बार, चार सौ रेडियम जैकेट्स व दस्तानों के अलावा 55 बैरियर आ गये हैं। एसपी ट्रैफिक रामलाल वर्मा ने बताया कि अब ट्रैफिक पुलिस को इन उपकरणों से मुस्तैद किया जायेगा।

सारे उपकरणों को एक साथ रखकर चलने के लिए एक विशेष वाहन होता है, लेकिन यहां तो पुलिस ने एक जिप्सी को जबरन इंटरसेप्टर बना रखा है। प्रशिक्षण के दौरान ट्रैफिक पुलिस कर्मियों का कहना था कि बुलेट पर लादकर तो उपकरण ले नहीं जाएंगे। इस पर एसपी ट्रैफिक ने कहा कि इंटरसेप्टर 50 लाख रुपये का आता है। इतना तो संभव नहीं है। जिसे जरूरत होती है, उसे वाहन मुहैया करा दिया जाता है।

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