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'मैनेजर' बने पुलिसकर्मी भी पीछे हटे

मुफ्त का खोया लेने वाले नौबस्ता थाना के दरोगा-सिपाही पहले तो राघवेंद्र पर लगे हत्या के आरोप को मैनेज करने में लगे रहे, लेकिन बाद में एसएसपी की सख्ती के चलते उन्होंने हाथ खड़े कर दिये।

सूत्रों का कहना है कि नौबस्ता के दरोगा-सिपाही मुफ्त का खोया उड़ाने के आदी हैं। हर तीज-त्योहार और पारिवारिक कार्यक्रम व समारोह में राघवेंद्र की आढ़त से पुलिसकर्मियों को खोया पहुंचता था। हत्या की वारदात में फंसने के बाद उसने 'साथी' पुलिसकर्मियों से मदद मांगी।

शाम चार बजे तक वह कई पुलिसकर्मियों के संपर्क में रहा, लेकिन रविवार को हुई लूट के बाद एसओ व चौकी इंचार्ज का हश्र देखने के बाद उन्होंने भी हाथ खड़े कर दिये। बताते हैं मददगार पुलिसकर्मियों ने उसे भूमिगत हो जाने की सलाह दी जिसके बाद मोबाइल फोन बंद कर वह गायब हो गया

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