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मुख्यमंत्री नियुक्त करेंगे अपना परामर्शी

 सूबे की जनता को बेहतर शासन देने और अधिकारियों की कार्यकुशलता बढ़ाने के लिए राज्य सरकार ने बिहार प्रशासनिक सुधार मिशन सोसाइटी गठित करने का निर्णय लिया है। इसके अलावा विश्वविद्यालयों के कर्मियों के बकाया वेतन और पेंशन के लिए 200 करोड़ रुपये दिये गये हैं। राज्य सरकार अब हर वर्ष 5 जून को संपूर्ण क्रान्ति दिवस मनायेगी और मुख्यमंत्री को अपना परामर्शी नियुक्त करने का अधिकार होगा।

यह निर्णय मंगलवार को हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में लिया गया। बैठक के निर्णयों की जनकारी देते हुए कैबिनेट समन्वय विभाग के प्रधान सचिव गिरीश शंकर ने बताया कि बिहार में प्रशासनिक सुधार के लिए ब्रिटेन की संस्था डीएफआईडी 18 मिलियन स्टर्लिग पाउंड (लगभग 126 करोड़ रुपये)की मदद दे रही है। इस राशि से होने वाले कार्यक्रमों को चलाने के लिए ही बिहार प्रशासनिक सुधार मिशन सोसाइटी गठित किया जा रहा है। यह सोसाइटी रजिस्ट्रेशन एक्ट के तहत निबंधित होगा लेकिन इसका संचालन कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग के तहत होगा। मुख्य सचिव इसके अध्यक्ष, विकास आयुक्त उपाध्यक्ष और मिशन के निदेशक सचिव होंगे। इनके अलावा बिपार्ड के महानिदेशक, वित्त विभाग के प्रधान सचिव, योजना एवं विकास विभाग के प्रधान सचिव, विधि विभाग के सचिव, कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग के सचिव और मिशन के अपर निदेशक इसके सदस्य होंगे।

उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालयों के लिए दो सौ करोड़ रुपये की राशि इस शर्त के साथ दी जा रही है कि वे ऑडिट करके इसका बंटवारा कर देंगे। पहले यह प्रावधान था कि ऑडिट के बाद ही विश्वविद्यालयों को राशि दी जएगी। लोकनायक जयप्रकाश नारायण द्वारा 5 जून 1975 को संपूर्ण क्रान्ति का आह्वान करने की याद में अब राज्य सरकार हर वर्ष 5 जून को राजकीय समारोह के रूप में संपूर्ण क्रान्ति दिवस मनाएगी।

 

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