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दिल्ली में रहते बिहार को भूले रहे लालू

 बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग को लेकर जदयू ने अब राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद को भी लपेटे में ले लिया है। यही नहीं पार्टी ने पहली बार लोकसभा चुनाव में केन्द्र में सरकार बनाने में असफलता का ठीकरा भी कमजोर विपक्ष के ऊपर भोड़ा। पार्टी ने आरोप लगाया कि जनसमस्याओं को गंभीरता से नहीं उठा पाने के कारण ही केन्द्र में सरकार बनाने में विपक्ष असफल रहा। 
    

पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता व सांसद शिवानंद तिवारी ने आरोप लगाया है कि लालू प्रसाद जब तक दिल्ली में ताकतवर मंत्री की भूमिका में रहे, बिहार को भूले रहे और अब जमीन पर आ जाने के बाद उन्हें बिहार की याद आने लगी है। पांच वर्षो तक वे केन्द्र में बिहार का प्रतिनिधित्व एक शक्तिशाली राजनेता के रूप में करते रहने के बावजूद कोई प्रयास नहीं किया। अब भी बिहार की आवाज दबाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि लालू प्रसाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा बिहार को विशेष राज्य का दर्जा दिलाने के प्रयास का समर्थन करने की बजाए अलग ही राग आलाप रहे हैं।
 

तिवारी ने कहा कि जनसमस्याओं को गंभीरता से उठाने में विपक्ष सफल नहीं हो पाया। पांच वर्षों के शासनकाल में देश की स्थिति बदतर ही हुई है। ह्यूमन डेवलपमेंट इंडैक्स में देश का स्थान 128 से 132 पर पहुंच गया है। गरीबों की संख्या पिछले चार वर्षो में 27 करोड़ से बढ़कर 32 करोड़ पहुंच गई। यही नहीं विश्व बैंक की रिपोर्ट बताती है कि देश के ग्रामीण इलाकों में 50 फीसदी और शहरों में 38 फीसदी लोग कुपोषण के शिकार हैं।

 

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