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ज़बानी खुजली

मेरे एक करीबी मित्र हैं डॉक्टर अग्रवाल। जाने-माने चर्मरोग विशेषज्ञ हैं। मैंने एक दिन उनसे पूछा कि जबानी खुजली के बारे में आपकी मेडिकल साइंस क्या कहती है? उनके हाथों के तोते उड़ गए। हकला कर बोले- ‘क्या? जबानी खुजली? यह क्या होती है? मैंने हर किस्म की खुजली के बारे में पढ़ा, एमडी किया... पांच साल तक सऊदी अरब में प्रैक्टिस की, मगर जबानी खुजली के बारे में आज तक नहीं सुना। आप ऊंची फेंक रहे हो।

मैंने धीरे से कहा- ‘आपने जवाब दे ही दिया। यह ऊंची फेंकना ही जबानी खुजली है। यह खुजली कुछ खास लोगों को ही होती है। चुनाव शुरू होने से पहले शुरू होती है, स्पीड पकड़ लेती है और नतीजे आते ही खुद ब खुद खत्म हो जाती है। जिन गड्ढों से निकल कर आती है, उन्हीं में दफन हो जाती है। मरीज की जबान नॉर्मल हो जाती है। जुकाम की तरह इसका भी कोई इलाज नहीं। खुद आमद, खुद रफ्त। केसेज़ सुनो।’

एक को जबानी खुजली हुई। पब्लिक में झोंक दिया कि हम पावर में आए तो पूरे देश में चावल पांच रुपए किलो बिकवा देंगे। खुदा जाने किस मुल्क के किस खेत के पानी में उगेगा वह धान, जिसका चावल इंडिया में पांच रुपए किलो बिकेगा? पब्लिक जानती है कि यह जबानी खुजली है। नतीजे आने के बाद न चाले रहेगा, न खुजली, न जबान। हमेशा यों ही चलता रहेगा।

दूसरे को जबानी खुजली हुई। जबान खुजला दी कि हमारे तख्तनशीन होते ही सारे स्कूलों में ब्रेक फास्ट, लंच, डिनर, कोला, चाय फ्री। गोया क्लासें पेड़ तले लगेंगी और स्कूल रसाेई घर में तब्दील हो जाएगा। पब्लिक समझ गई कि जबानी खुजली है। खुजला लेने दो। जमानत जब्त होते ही खुद के लंच-डिनर के लाले पड़ जाएंगे। एक और बंदे की गाड़ी चुनाव प्रचार के दौराव गांव की कच्ची सड़क पर गड्ढे में फंस गई। गांव वालों ने पहिया बाहर निकाला।

अगले ने जबान खुजला दी कि तुसी फिकर न करो। चंद रोज दी गल है। जीतते ही पूरी सड़क पक्की करा देंगे। किनारे-किनारे हाई पॉवर हेलोजन लाइट। आपकी बैलगाड़ी हमारी बोलेरो की तरह रपारप दौड़ेगी। लोग मुस्करा दिए कि जबानी खुजली है। खुद गड्ढे से बाहर आ जाएं, तो इसका मुकद्दर। एक और ने फेंकी कि सबको नौकरी दिलाएंगे। खुशहाली लाएंगे। भीड़ में एक लड़के ने बुजुर्ग से कहा- ‘ताऊ, इसकी जबानी खुजली तो आकाश छूने लग पड़ी है। डॉ. अग्रवाल मुस्करा कर यह कहते चले गए- ‘जबानी खुजली रिसर्च पर आपको एमडी मिलनी चाहिए। मुझे कबीर याद आ गए। कह गए हैं- ‘शब्द सम्हारे बोलिए, शब्द के हाथ न पांव...एक शब्द औषध करे, एक शब्द करे घाव।

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