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अभी भी लालच में खुदाई कर रहे ग्रामीण

बड़हलगंज मुख्यालय से करीब दस किमी दूर मुकुन्दवार गाँव में ग्रामीणों द्वारा पिछले एक सप्ताह में की गई खुदाई में मिले सोने के ज्यादातर दुर्लभ सिक्के गोलाबाजार में 14 से 16 हजर रु में बेच दिए गए। कुछ सिक्के अभी भी ग्रामीणों के पास हैं मगर वे इसे कबूल नहीं रहे हैं। ये सिक्के, वहाँ मिलीं टेराकोटा की मूर्तियाँ आदि मुकुन्दवार में कुषाणकालीन सभ्यता के प्रमाण के तौर पर हैं परन्तु प्रशासन और पुलिस की हद दर्जे की लापरवाही से इन सिक्कों को नष्ट कर दिए जाने की आशंका है।


उधर गाँव में चर्चा है कि ये सिक्के अभिशप्त हैं। पूर्व में जिन्हें भी ऐसे सिक्के मिले और उन्होंने इन्हें बेचा, उन्हें नाना प्रकार की दिक्कतों का सामना करना पड़ा। गाँव के प्रधान नागेन्द्र नायक का कहना है कि ऐसे सिक्कों की बिक्री से मिले पैसे काम नहीं आते हैं।


गाँव के लोगों का कहना है कि जिस टीले के पास सिक्के मिल रहे हैं उसका पता वर्ष 1998 की बाढ़ के बाद चला। बाढ़ का पानी उतर जाने पर टीले के पास से लोगों को कुछ पुरानी चीजें मिलने लगीं। तब से हर बरसात के बाद कुछ न कुछ वहाँ से मिला करता था मगर इस बार सोने के सिक्के मिलने से गाँव चारों ओर चर्चा में आ गया। वहाँ नदी के कटान स्थल के पास पाँच सौ मीटर के क्षेत्र में मोटी दीवार दिख रही है। वहाँ आधा दजर्न कुओं के निशान हैं। कुछ स्थानों पर लगता है कि सुरंग रही होगी।


वहाँ के 70 वर्षीय सुक्खू केवट एक रोचक कहानी सुनाते हैं। उनके दादा बताया करते थे कि कई सौ साल पहले वह स्थान मुकुन्दपुर शहर था जिसके राज का नाम मकरन्द था। वहाँ थारू जाति के लोग रहा करते थे। वहाँ एक देवी स्थान है जिसे थारुओं की देवी कहा जाता है।

कुछ साल पहले तक नेपाल की ओर से थारू लोग घोड़े और खच्चर से आते थे तथा रात भर रहने के बाद चले जाते थे। तब चर्चा थी कि वे यहाँ जमीन में छिपे आभूषण और सिक्के खोद कर ले जाते थे।

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  • Web Title:गोला बाजार में बिके कई दुर्लभ सिक्के