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पोस्टमार्टम के समय गैरकानूनी तरीके से निकाली किडनी

नई दिल्ली।  दिल्ली हाईकोर्ट ने एक फौजी के शव से पोस्टमार्टम के समय गैरकानूनी तरीके से किडनी निकालने के मामले को गंभीरता से लिया है। हाईकोर्ट ने मृतक फौजी की पत्नी की याचिका पर सुनवाई करते हुए निर्देश दिया है कि याचिकाकर्ता को दस लाख रुपये बतौर मुआवजा अदा किए जाएं। दरअसल शव की गैरकानूनी तरीके से किडनी निकालने का मामला तब सामने आया, जब मृतक की पहली पोस्टमार्टम रिपोर्ट में कहा गया कि शव के एक हिस्से की किडनी केमिकल परीक्षण के लिए निकाली गई है। जबकि, दूसरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट में कहा गया कि शव के दायें भाग की किडनी गायब है।


जस्टिस अरुणा सुरेश ने केन्द्र सरकार को मुआवजा अदायगी के आदेश देते हुए कहा कि ‘माना जाता है कि किसी भी व्यक्ति के शव का पोस्टमार्टम करने वाला डाक्टर एक अच्छा और ईमानदार व्यक्ति होता है, और मृतक के परिवार वाले पोस्टमार्टम करने वाले डाक्टरों पर ही न्याय की उम्मीद लगाते हैं। इस तरह की घटनाओं से आम जन का विश्वास डाक्टरों से उठ जाएगा।’ अदालत का यह आदेश मृतक आर्मीमेन अजय कुमार की पत्नी द्वारा दायर याचिका पर आया है।


दरअसल अजय ने जम्मू एंव कश्मीर में आत्महत्या कर ली थी। परन्तु उनकी पत्नी का मानना था कि यह आत्महत्या नहीं, बल्कि हत्या है। इसलिए शव का एक बार पोस्टमार्टम होने के बावजूद मृतक की पत्नी ने शंका जताते हुए दोबारा पोस्टमार्टम की मांग की थी। अदालत ने इस सारे प्रकरण के लिए सरकार को जिम्मेदार ठहराया है। लिहाजा अदालत ने केन्द्र सरकार को मृतक की पत्नी को मुआवजा अदा करने के आदेश दिए हैं। अदालत ने सरकार को निर्देश दिए हैं कि तीन माह के भीतर मुआवजे की अदायगी कर दी जाए।

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