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शुरू हुई बजट की कवायद

शुरू हुई बजट की कवायद

यूपीए सरकार ने आगामी आम बजट को लेकर विधिवत तौर पर कवायद शुरू कर दी है। वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने नॉथ ब्लॉक में अपनी कुर्सी संभालने के लिए सहयोगी अधिकारियों के साथ बैठकें कर इस मामले में व्यापक विचार विमर्श किया। मंत्रालय आम बजट पेश होने से पहले संसद में एक एप्रोच पेपर पेश करने का मूड बना रहा है जिसके तहत अर्थव्यवस्था की दशा और आगामी दिशा का संकेत होगा।

यही नहीं, सरकार चार जून को राष्ट्रपति के संसद सदनों को संयुक्त संबोधन के जरिए भी अपनी रणनीति का दिशा का खुलासा करेगी। वित्त मंत्री के साथ बैठकों में वित्त सचिव, राजस्व सचिव, व्यय सचिव, विनिवेश सचिव और केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) चेयरमैन और केंद्रीय उत्पाद एवं सीमा शुल्क बोर्ड (चेयरमैन) मौजूद थे।

बैठकों में वित्त मंत्री ने विभिन्न कार्यक्रमों की समीक्षा की और आगामी बजट से जुड़े मुद्दों पर व्यापक विचार विमर्श किया।दरअसल आगामी बजट को लेकर वित्त मंत्री पर कॉरपोरेट क्षेत्र को टैक्स रियायतों की जगह ढांचागत सहित विभिन्न क्षेत्रों पर सरकारी व्यय बढ़ाने का दबाव बढ़ता जा रहा है। राजस्व विभाग के अधिकारी इस मूड में नहीं हैं कि अर्थव्यवस्था को उबारने के लिए टैक्स रियायतों के नाम सरकार राजस्व लुटा दे बल्कि इसकी जगह अर्थव्यवस्था को उबारने के वैकल्पि तौर-तरीकों पर ज्यादा जोर दिया जाये।

उदाहरण के तौर पर किसी टैक्स रियायत से सरकार को 10,000 करोड़ का घाटा होता है, उससे घरेलू मांग में बढ़ोत्तरी के उपाय से इसी पैसे से सड़क बनाने और पेय जल उपलब्ध कराने का ढांचागत काम हो सकता है जिसके जरिए न सिर्फ रोजगार आएगा बल्कि इन क्षेत्रों से जुड़े उद्योगों की मांग भी बढ़ सकेगी।

राजस्व विभाग का विचार है कि सरकार को टैक्स रियायतों में ज्यादा जोर नहीं देना चाहिये, बल्कि इसकी जगह सरकारी व्यय बढ़ाते हुये सामाजिक और ढांचागत क्षेत्रों को सीधा लाभ पहुंचाने की व्यवस्था करनी चाहिये। सरकारी व्यय बढ़ाने के लिए टैक्स बढ़ाने का विकल्प इस समय लागू नहीं हो सकता है। लिहाजा, कम से कम मौजूदा टैक्स ढांचे से ऐसी छेड़छाड़ कम की जाये जिससे राजस्व संग्रह प्रभावित हो जाये।

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